नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में की गई सख्त नौसैनिक नाकेबंदी के बावजूद एक ब्लैकलिस्टेड चीनी टैंकर के गुजरने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की रणनीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने सोमवार शाम करीब 7:30 बजे (भारतीय समयानुसार) होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कड़ा घेरा बना लिया था। इसका उद्देश्य ईरान से जुड़े तेल और गैस व्यापार पर रोक लगाना था। हालांकि, इस कार्रवाई का तत्काल असर सीमित दिखाई दिया।
नाकेबंदी के बाद गुजरने वाला पहला जहाज
रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि एलएसईजी के शिपिंग डेटा के अनुसार, अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत सूचीबद्ध एक चीनी टैंकर मंगलवार को इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजर गया। बताया जा रहा है कि यह नाकेबंदी के बाद गुजरने वाला पहला जहाज है।
लगभग 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा था
इस जहाज, जिसका नाम ‘रिच स्टार्री’ है (पहले ‘फुल स्टार’), में लगभग 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लदा था। यह माल यूएई के हमरिया पोर्ट से लोड किया गया था। यह मीडियम-रेंज टैंकर पहले भी 2023 में ईरान से जुड़े ऊर्जा व्यापार में कथित रूप से शामिल रहने के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर चुका है।
ईरान के केश्म द्वीप के पास मौजूद था
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज 24 घंटे के भीतर दूसरी बार फारस की खाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। नाकेबंदी शुरू होने के समय यह ईरान के केश्म द्वीप के पास मौजूद था और पहले प्रयास में लौट गया था। बाद में कुछ घंटों के अंतराल पर इसने फिर से बाहर निकलने की कोशिश की और सफल रहा।
सिग्नल में खुद को चीनी स्वामित्व वाला बताया
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जहाज ने अपने सिग्नल में खुद को चीनी स्वामित्व वाला बताया, जो आमतौर पर सुरक्षा कारणों से अपनाई जाने वाली रणनीति मानी जाती है। इसी दौरान, ‘एलपिस’ नाम का एक अन्य जहाज भी ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था, जो पहले ईरान के एक बंदरगाह पर रुका था।
चीन के रक्षा मंत्री ने कही बड़ी बात
हालांकि, नाकेबंदी शुरू होने के बाद से सक्रिय ट्रांसपोंडर वाले जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित देखी गई है। इस बीच, चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून ने हाल ही में स्पष्ट किया कि उनके देश के जहाज होर्मुज के जलक्षेत्र में नियमित रूप से आते-जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ चीन के ऊर्जा और व्यापारिक समझौते हैं, और बीजिंग उन्हें जारी रखेगा।










































