पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम खण्डवा के धरमटोला निवासियों का सब्र अब टूट चुका है। १७ अगस्त को ग्रामीणों के द्वारा ग्राम से एसडीएम कार्यालय तक पैदल रैली निकाली गई। इसमें महिला पुरुष बच्चे सभी शामिल रहे जिनके द्वारा सडक़ निर्माण की मांग को लेकर नारेबाजी की जाती रही। आजादी के दशकों बाद भी पक्की सडक़ नही बनने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से त्रस्त ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी कार्तिकेय जायसवाल एवं विधायक विवेक पटेल के समक्ष उपस्थित होकर पक्की सडक़ निर्माण कराने मांग की हैं।
मार्ग बना मुसीबत बड़ी आबादी प्रभावित
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया की धरमटोला मुख्य बस्ती से लगभग २ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ लगभग २५ मकान हैं उसमें करीब ५०० लोग निवास करते हैं। मुख्य मार्ग से जोडऩे वाला यह १ किमी का रास्ता पूरी तरह कच्चा और कीचडय़ुक्त है। बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह से दलदल में बदल जाता है जिससे धरमटोला का संपर्क मुख्य गाँव और शहर से पूरी तरह कट जाता है। रास्ते की दयनीय स्थिति के कारण बच्चों को स्कूल जाने, किसानों को मंडी तक अपनी उपज पहुँचाने और आम लोगों को दैनिक राशन व इलाज के लिए जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर होती है। बारिश के मौसम में यदि किसी बुजुर्ग या गर्भवती महिला को तुरंत अस्पताल ले जाना हो तो एम्बुलेंस या अन्य वाहन टोले तक नहीं पहुँच पाते जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। पिछले ३-४ वर्षों से ग्रामीण लगातार पंचायत, ग्राम सभा और तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। क्या हमारा गाँव इस देश या जिले का हिस्सा नहीं है क्या हम लोग कोई सजा भुगत रहे हैं क्या हमारे बच्चे पढ़ाई से वंचित रहे। ग्रामीणों ने एसडीएम से उनकी समस्या को अपनी समस्या समझते हुए जल्द से जल्द पक्की सडक़ का निर्माण कराया जाने मांग की हैं।
सडक़ नही बनने पर बच्चों को भविष्य खतरे में है-महेंद्र बिसेन
महेंद्र बिसेन ने बताया कि धरमटोला में मेरा खेत है जहां समय समय पर खेती कार्यों के लिए हमें जाना होता है। सडक़ की परेशानी से हम जूझते हुए आते जाते हैं परंतु गांव में हम जब देखते हैं तो छोटे.छोटे बच्चे वहां पर भारी परेशानी में रहते हैं। उनका भविष्य खतरे में दिखता है बारिश के समय दो से तीन दिन स्कूल नहीं जा पाते हैं वहां आना जाना एक बड़ी समस्या बना रहता है। सरपंच से हमने बात भी किये थे तो उन्होंने पूरा विषय बताया था। इस सडक़ के निर्माण के लिए करीब ६ बार सर्वे हो चुका है पर आज तक रोड नहीं बनी है बताते हैं कि प्रधानमंत्री सडक़ में भी इसका सर्वे हुआ है परंतु आज तक कुछ नहीं हुआ है। दिक्कत यथावत है स्थिति यह है कि रात की जगह दिन में भी किसी की तबीयत खराब होती है तो गांव का डॉक्टर धरमटोली तक नहीं पहुंच सकता।
सडक़ बनाने ग्रामीणों के द्वारा लगातार प्रयास कर रहे है-कमलेश नागेश्वर
उपसरपंच कमलेश नागेश्वर ने बताया कि हमारे ग्राम खंडवा का एक धरमेटोला है वह काफ ी दूरी पर है जहां पर शासन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। अधिकारी से बात करते हैं तो प्रधानमंत्री सडक़ में नाम आ गया है टीएस हो गया है बताते हैं। हम उसके लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं क्योंकि वहां के बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं गर्भवती महिलाओं को कंधे पर बस्ती तक लाना होता है जहां एंबुलेंस बैठते है। आज तक वहां पर कुछ नहीं हुआ है सडक़ जो है उसके लिए निजी जमीन रास्ते पर है जिसे शासन प्रशासन ही बना सकता है बैठक में हमने लोगों से चर्चा की तो किसान जमीन देने तैयार है इसकी दूरी ज्यादा है और पंचायत बनाने में समर्थ नहीं है। इसलिए अभी हम एसडीएम के पास आए हैं इसके बाद जनप्रतिनिधियों के पास भी जायेगे।










































