समान सैलरी होने के बावजूद दो अलग-अलग व्यक्तियों की लोन एलिजिबिलिटी (Loan Eligibility) अलग-अलग हो सकती है। जानिए बैंक किन महत्वपूर्ण कारकों के आधार पर तय करते हैं कि किसे कितना लोन मिलेगा और किसका आवेदन खारिज हो सकता है।अक्सर देखा जाता है कि जब दो व्यक्ति, जिनकी मासिक सैलरी (Monthly Salary) बिल्कुल एक समान है, एक ही बैंक में पर्सनल या होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें मिलने वाली लोन राशि या ब्याज दरों में बड़ा अंतर होता है। कई बार एक व्यक्ति को आसानी से मनमुताबिक लोन मिल जाता है, जबकि दूसरे का आवेदन या तो खारिज कर दिया जाता है या उसे बहुत कम रकम का लोन ऑफर किया जाता है। आम लोगों को यह प्रक्रिया असमान लग सकती है, लेकिन बैंक लोन देने का फैसला केवल आपकी सैलरी देखकर नहीं, बल्कि कई अन्य वित्तीय और व्यक्तिगत मानकों के आधार पर करते हैं।
कैसे तय होती है आपकी लोन की लिमिट
लोन तय करने में सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारक FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) होता है। एफओआईआर यह दर्शाता है कि आपकी मौजूदा मासिक आय का कितना प्रतिशत हिस्सा पहले से चल रही ईएमआई (EMI) या क्रेडिट कार्ड बिलों को चुकाने में जा रहा है। भले ही दो लोगों की सैलरी ₹1 लाख हो, लेकिन यदि एक व्यक्ति पहले से कोई ईएमआई नहीं दे रहा है, तो उसका एफओआईआर कम (0%) होगा। वहीं, यदि दूसरा व्यक्ति पहले से ₹40,000 की ईएमआई दे रहा है, तो उसकी नई ईएमआई चुकाने की क्षमता कम मानी जाएगी। बैंक आमतौर पर आपकी इन-हैंड सैलरी के 40% से 50% से अधिक राशि ईएमआई में नहीं जाने देते।
दूसरा प्रमुख कारक आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) और क्रेडिट हिस्ट्री है। 750 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर यह साबित करता है कि आपने अतीत में अपने सभी लोन और क्रेडिट कार्ड बिलों का समय पर भुगतान किया है। जिस व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है, बैंक उसे कम जोखिम भरा मानते हैं और उसे ज्यादा लोन राशि के साथ-साथ कम ब्याज दर की पेशकश करते हैं। इसके विपरीत, यदि आपकी सैलरी ज्यादा भी है, लेकिन पुराना रीपेमेंट रिकॉर्ड (Repayment History) खराब है, तो बैंक आपको लोन देने से हिचकिचाएंगेतीसरा बड़ा पहलू आपकी आवेदक की उम्र (Age) और शेष कार्यकाल है। उदाहरण के लिए, 28 साल के युवा कर्मचारी के पास रिटायरमेंट तक लोन चुकाने के लिए 30 से अधिक वर्ष होते हैं, जिससे बैंक उसे लंबी अवधि का होम लोन दे सकते हैं। वहीं, यदि 52 साल का कोई व्यक्ति उसी सैलरी पर आवेदन करता है, तो उसके पास केवल 8 साल की कार्य अवधि बची होती है। कम समय उपलब्ध होने के कारण बैंक उसकी मासिक ईएमआई क्षमता को सीमित रखते हुए कम लोन राशि ही मंजूर करते हैं।
दो लोग के अलग लोन कैसे होते हैं?
इसके अलावा, आप किस कंपनी में काम करते हैं और आपकी नौकरी की स्थिरता भी मायने रखती है। बैंक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs), नामी प्राइवेट फर्मों या सरकारी नौकरी करने वालों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वहां आय की निरंतरता अधिक सुरक्षित मानी जाती है। साथ ही, आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दर्ज हालिया लोन इंक्वायरी (Recent Hard Enquiries) भी अहम भूमिका निभाती हैं; यदि आपने कम समय में कई बैंकों में लोन के लिए अप्लाई किया है, तो आपको ‘क्रेडिट हंग्री’ माना जा सकता है। इन सभी वजहों से समान सैलरी होने पर भी लोन का फैसला अलग होता है।।










































