Rajkumar Santoshi’s Batwara 1947: हाल ही में जूम के साथ बात करते हुए राजकुमार संतोषी ने सनी देओल के साथ मतभेद होने और आमिर खान द्वारा ‘बंटवारा 1947’ की मेकिंग में दखल देने के बारे में खुलकर बात की।Rajkumar Santoshi’s Batwara 1947: राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ (Batwara 1947) की बॉक्स ऑफिस पर कमाई कुछ खास नहीं रही है। इस मूवी में सनी देओल, शबाना आजमी और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन आमिर खान के बैनर तले हुआ है और वो इसके प्रोड्यूसर भी हैं। फिल्म को लेकर ऐसी खबरें आ रही थी कि इसकी मेकिंग में आमिर खान ने दखल दी थी। हाल ही में Zoom के साथ एक खास बातचीत में राजकुमार संतोषी ने बताया कि फिल्म की मेकिंग के दौरान आमिर खान ने कभी भी दखल नहीं दिया। इसके अलावा उन्होंने सनी देओल के साथ अपने मतभेदों को लेकर भी खुलकर बात कीआमिर खान ने फिल्म की मेकिंग में नहीं दी दखल
राजकुमार संतोषी ने बताया कि ‘बंटवारा 1947’ पर साल वो 2008 से काम कर रहे थे। राजकुमार संतोषी ने हमारे साथ हुई बातचीत में ऐसी खबरों को बेबुनियाद बताया, जिनमें यह दावा किया गया था कि आमिर खान फिल्म की मेकिंग के दौरान दखल दे रहे थे। उन्होंने बताया कि आमिर फिल्म को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव देते थे। राजकुमार संतोषी ने कहा, ‘मैं आमिर खान का एक इंसान, अभिनेता, निर्देशक और क्रिएटिव व्यक्ति के तौर पर सम्मान करता हूं। मैं हमेशा से ही उनके साथ काम करना चाहता था। हमारे बीच कोई मतभेद नहीं हुआ। हम हमेशा एक ही बात पर सहमत होते हैं। मैंने ‘बंटवारा 1947′ का निर्देशन किया है लेकिन आमिर ने भी फिल्म में कोई दखल नहीं दी।’
उन्होंने आगे कहा, ‘आमिर खान ने स्क्रीनप्ले, बैकग्राउंड म्यूजिक, एडिटिंग और बाकी चीजों को लेकर अपने आईडिया शेयर किए थे। वह कभी दखल नहीं देते। लोग उनके बारे में गलत बातें कहते हैं। वह एक असिस्टेंट डायरेक्टर की तरह काम करते हैं। मैं उनके साथ फिर से काम करने के लिए उत्साहित हूं।’सनी देओल संग हुए मतभेद पर बोले राजकुमार संतोषी
राजकुमार संतोषी ने सनी देओल के साथ ‘घायल’, ‘दामिनी’ और ‘घातक’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया था। हालांकि ‘घातक’ के बाद दोनों ने लंबे समय तक फिल्म नहीं की। सनी देओल संग मतभेद की अफवाहों पर राजकुमार संतोषी ने कहा, ‘हम हमेशा अच्छे दोस्त रहे हैं। हम सालों से कांटेक्ट में हैं। हमने यह फिल्म 2008-2009 में ही बनाने का फैसला कर लिया था, जब हमने यह नाटक देखा था। ‘घातक’ के बाद हम ऐसी कहानी लेकर आना चाहते थे, जो मुझे और दूसरों को प्रेरित करे। हम एक ही चीज दोहराना नहीं चाहते थे।’










































