क्या बिना बड़े अनुष्ठान के हो सकती है ग्रह शांति, करें सावन में विशेष उपाय

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श्रद्धा, संकल्प और विधिपूर्वक किए गए सरल उपाय भी ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने में सहायक माने गए हैं। सावन का यह आध्यात्मिक अवसर व्यक्ति को स्वयं अपने ग्रह कष्टों की शांति का प्रयास करने तथा जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है। आकाशीय गोचर ग्रहों की स्थिति एवं अपनी व्यक्तिगत ग्रहदशा अनुसार ग्रह कष्ट की निवृत्ति के लिए जन्मकुण्डली में चलने वाली महादशा-अन्तर्दशा अथवा जो भी ग्रह पीड़ादायक हों, उसके अनुसार सावन में अनिष्ट ग्रहों की शांति स्वयं कर सकते हैं।

सावन में स्वयं करें अनिष्ट ग्रहों की शांति
यदि जन्मपत्रिका में सूर्य से संबंधित कष्ट है तो सावन में रविवार को शिवोपासना कर शिव मंत्रों का जप श्रद्धापूर्वक करें। यदि जन्मपत्रिका में चन्द्रमा से संबंधित कष्ट है तो शिवलिंग पर दूध की धारा अर्पित करें अथवा रूद्राभिषेक करवाएं। यदि जन्मपत्रिका में मंगल से संबंधित कष्ट है तो सावन में मंगलवार के दिन मंगला गौरी का व्रत कर शिव सहित मां पार्वती की उपासना करें। यदि जन्मपत्रिका में बुध से संबंधित पीड़ा हो तो श्रावण मास में बुधवार को गन्ने के रस से भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करें।

बृहस्पति ग्रह निर्बल होने के कारण कन्या के विवाह आदि में बाधा आ रही हो तो शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाएं। यदि जन्मपत्रिका में शुक्र ग्रह से संबंधित कष्ट हो तो पंचामृत, शहद, घृत से भगवान शिव का अभिषेेक करें। यदि शनि की साढ़ेसाती से पीड़ा हो अथवा राहु-केतु से संबंधित कष्ट हो तो शिवलिंग पर काला तिल मिश्रित जल पूरे सावन माह में अर्पण करना चाहिए।

सावन के महीने में शिव की आराधना, अन्तर्मन के दुःख को दूर कर, ग्रह कष्ट एवं अन्य किसी भी प्रकार की बाधा को दूर कर जीवन में उमंग एवं शुभ तत्व की वृद्धि करती है। सावन के मंगलवार तथा शनिवार को गणेश वंदना, शिवोपसाना के साथ राम नाम लिखने से शनि पीड़ा मुक्ति और हनुमत कृपा भी प्राप्त होती है क्योंकि हनुमान जी शिव जी के रूद्र अवतार माने गए हैं। लाल रंग की कलम से सावन में प्रतिदिन कम से कम 108 बार राम नाम लिखना चाहिए।

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