चीन की छाती पर सांप लोटना तय! ड्रैगन के डर को ठेंगा दिखाकर भारत से लड़ाकू विमान, मिसाइल, पनडुब्बी डील कर रहा ये देश

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सियोल/नई दिल्ली: चीन के अड़ंगे के बावजूद भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा साझेदारी काफी तेजी से बढ़ रही है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पिछले हफ्ते दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में थे और इस दौरान चर्चा तेज हो गई कि क्या चीन, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग में कोई बाधा बन रहा है? दरअसल पिछले कुछ महीनों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच काफी तेजी से रक्षा सौदे हो रहे हैं। इस साल अप्रैल महीने में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग नई दिल्ली आए थे और इस दौरान भारत के साथ ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ और “संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण” की घोषणा की गई थी। इसके ठीक बाद राजनाथ सिंह ने 20 मई को सियोल गये और दक्षिण कोरियाई के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

इस दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने रक्षा सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की और उद्योग, उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियां, सैन्य आदान-प्रदान, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान कई अहम चीजें जिसपर हर किसी की नजर थी वो ये कि भारत के रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के ‘रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन’ के मंत्री, ली योंग-चुल से मुलाकात की और दोनों इस बात पर सहमत हुए कि “संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और संयुक्त निर्यात के अवसर पैदा करने के लिए आपसी प्रयासों का लाभ उठाया जाए”। भारत-कोरिया रक्षा नवाचार त्वरक इकोसिस्टम (KIND-X) की रूपरेखा तैयार करने पर बात हुई।

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