नई दिल्ली: भारत और साइप्रस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ में तब्दील करने की योजना बनाई है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के लिए 5 साल का रोडमैप जारी किया है जिसमें साइबर सुरक्षा पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया गया है। इसके अलावा समुद्री परिवहन, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। ये फैसले शुक्रवार को राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के बीच हुई मुलाकात के दौरान लिए गए हैं। साइप्रस के साथ समुद्री परिवहन समझौता काफी महत्वपूर्ण है और इसे तुर्की के लिए जैसे का तैसा जवाब माना जा रहा है।
दोनों पक्षों ने छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें आतंकवाद-रोधी उपायों पर एक संयुक्त कार्य समूह गठित करने, राजनयिक प्रशिक्षण, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी, ‘खोज और बचाव’ कार्यों में आधिकारिक समन्वय और सहयोग स्थापित करने के अलावा उच्च शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक सहयोग से संबंधित समझौता ज्ञापन शामिल हैं। लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि साइप्रस के शीर्ष अधिकारियों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि दोनों देशों ने इस क्षेत्र में तुर्की के बढ़ते प्रभाव पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया है। इस संबंध में दोनों देशों की तरफ से एक साझा “चिंता” जताई गई है। इसमें पिछले साल भारत से संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को मिला तुर्की का समर्थन और तुर्की-साइप्रस में तनावपूर्ण संबंध हैं।










































