क्या बदलेंगे नियम?
संशोधन विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु का समय पर पंजीकरण सुनिश्चित करना और लंबे समय बाद होने वाले पंजीकरण पर सख्ती बढ़ाना है। फिलहाल, यदि किसी मामले में एक वर्ष से अधिक की देरी होती है तो जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकता है।
लंबित मामलों में अब केवल प्रशासनिक मंजूरी पर्याप्त नहीं
नए कानून के लागू होने के बाद यह व्यवस्था केवल एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों तक सीमित रहेगी। यदि पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक का विलंब होता है, तो संबंधित व्यक्ति को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करना होगा। यानी लंबे समय से लंबित मामलों में अब केवल प्रशासनिक मंजूरी पर्याप्त नहीं होगी।
विपक्ष के हंगामे के बीच पास हुआ विधेयक
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। प्रश्नकाल नहीं चल सका और सदन को पहले दोपहर तक तथा बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। दोपहर में सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को सदन में पारित कराने के लिए पेश किया। विपक्ष के विरोध के बीच इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस विधेयक पर चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने बहस में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
राज्यसभा में भी नहीं हो सका कामकाज
राज्यसभा में भी विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लगातार व्यवधान के कारण सभापति ने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। इस मानसून सत्र में अब तक संसद लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दे चुकी है।










































