US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्लामाबाद एक बार फिर कूटनीतिक केंद्र बनता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प ने शांति वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का ऐलान किया है और संकेत दिया है कि समझौता होने पर वे खुद भी इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ईरान की ओर से वार्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पहले बातचीत से इनकार के बाद, रिपोर्ट्स में मोजतबा खामेनेई द्वारा वार्ता में भाग लेने की मंजूरी देने की बात सामने आई है। इस बीच 14 दिन का युद्धविराम खत्म होने वाला है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर कूटनीति का अखाड़ा बनने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वह अपने प्रतिनिधियों को शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद भेज रहे हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कोई समझौता फाइनल होता है, तो वह खुद भी वहां जा सकते हैं या वर्चुअली तौर पर बैठक का हिस्सा बन सकते हैं।
हालांकि, दूसरे दौर की बातचीत को लेकर ईरान ने अब तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग लेगा या नहीं। सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया। हालांकि, कुछ घंटों बाद, एक्सियोस ने बताया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद वार्ता में भाग लेने के लिए हरी झंडी दे दी है।
बुधवार को खत्म होने वाला है युद्धविराम
गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान वार्ता का पहला दौर 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में आयोजित किया गया था। हालांकि, समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को घोषित 14 दिवसीय युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने वाला है। सोमवार रात (स्थानीय समय) को ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि यदि वार्ता की समय सीमा चूक जाती है तो ईरान के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ट्रंप की चेतावनी का ईरान ने दिया जवाब
दूसरे दौर के वार्त से पहले अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग भी तेज हो चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा, “ठीक है, वे बातचीत करेंगे और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होंगी।”
उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमताओं के संबंध में अपने प्रशासन के प्राथमिक उद्देश्य पर जोर देते हुए आगे कहा, “उम्मीद है, वे एक उचित समझौता करेंगे और अपने देश का पुनर्निर्माण करेंगे, लेकिन जब वे ऐसा करेंगे, तो उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।
वहीं, ट्रंप के इस सख्त लहजे से ईरान खफा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर बातचीत की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलने का प्रयास करने का आरोप लगाया। X पर पोस्ट करते हुए गालिबफ ने कहा कि ईरान दबाव में नहीं आएगा और उन्होंने कहा, “हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते हैं, और पिछले दो हफ्तों में, हमने युद्ध के मैदान में नए पत्ते खोलने की तैयारी कर ली है।”










































