नई दिल्ली: चीन ने शनिवार (23 मई) को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत दलाई लामा के पुनर्जन्म की प्रक्रिया में हस्तक्षेप न करे। उसने दलाई लामा के अगले अवतार को चीन का आंतरिक मामला बताया है। इसके अलावा चीन ने यह उम्मीद भी जताई है कि भारत तिब्बत की स्वतंत्रता की वकालत करने वाली गतिविधियों के लिए कोई मंच उपलब्ध नहीं कराएगा। भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ये बातें कही हैं। इसीलिए सवाल ये हैं कि आखिर चीन दलाई लामा के अवतार के आने से पहले ही क्यों डरा हुआ है?
चीनी प्रवक्ता ने लिखा “दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा पूरी तरह से चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी बाहरी दखल की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा “तथाकथित ‘केंद्रीय तिब्बती प्रशासन’ को किसी भी संप्रभु देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है और न ही इसके नेतृत्व के पास तिब्बती लोगों का प्रतिनिधित्व करने की कोई वैधता है और न ही पुनर्जन्म की प्रक्रिया के संबंध में कोई दावा करने का अधिकार है।” इस पोस्ट में यह भी कहा गया है कि भारत ने तिब्बत से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।दलाई लामा के पुनर्जन्म को लेकर विवाद क्या है?
दलाई लामा ने 2 जुलाई को एक बयान में कहा था कि उनके पुनर्जन्म को पहचानने का “एकमात्र अधिकार” गादेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास है और “किसी और के पास इस मामले में दखल देने का ऐसा कोई अधिकार नहीं है।” इसके जवाब में चीन, जो दलाई लामा को एक अलगाववादी मानता है उस ने कहा था कि किसी भी पुनर्जन्म को बीजिंग से मंजूरी मिलनी चाहिए। इसके ठीक बाद और पहली बार भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू जो खुद एक बौद्ध हैं उन्होंने 3 जुलाई को दलाई लामा के बयान पर सार्वजनिक रूप से जवाब दिया। उन्होंने PTI से कहा कि जो लोग दलाई लामा को मानते हैं उन्हें लगता है कि पुनर्जन्म का फैसला तय रिवाजों के हिसाब से और दलाई लामा की इच्छा के अनुसार ही होना चाहिए।










































