पाकिस्तान बॉर्डर पर तालिबान का खतरनाक प्लान, 8000 जवानों की स्पेशल फोर्स, सुप्रीम लीडर का होगा सीधा कंट्रोल

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काबुल: अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी सैन्य योजना बनाई है। तालिबान नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा की सुरक्षा के लिए एक खास यूनिट बनाने का आदेश दिया है। अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस यूनिट में 8000 सैनिक होंगे। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह यूनिट खास तौर पर पाकिस्तान के साथ सीमा पर सुरक्षा रखने के लिए बनाई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस यूनिट को हिबाती के नाम से जाना जाएगा। यह एक स्पेशल फोर्स होगी जिसे तालिबान के दूसरे बलों के मुकाबले ज्यादा सैलरी और सुविधाएं मिलेंगी। यह फोर्स ऐसे समय में बनाई जा रही है, जब तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान ने हाल के महीने में अफगानिस्तान पर कई हवाई हमले किए हैं, जिनके बाद तालिबान ने भी सीमा पर जवाबी हमले किए हैं।डूरंड लाइन पर होगी पूरी जिम्मेदारी

तालिबान नेतृत्व ने इस नई बॉर्डर फोर्स को तेजी से तैयार करने का निर्देश दिया है। पूरी तरह तैयार होने के बाद डूरंड लाइन की निगरानी और सीमा पर किसी भी तरह की सैन्य हलचल, झड़प या सीजफायर से जुड़े मामलों को संभालने की जिम्मेदारी इसी यूनिट के पास होगी।

अफगानिस्तान इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सैनिक अपनी पोस्ट पर अभी बने रहेंगे, लेकिन कंट्रोल और कमांड इसी यूनिट के पास होगा। इस यूनिट के 4000 सदस्य पहले से ही कंधार के झारी जिले में एक ब्रिगेड बेस पर तैनात हैं। बाकी 4000 जवान अभी काबुल में हैं।

तालिबान की नई यूनिट में क्या है खास

  • नई फोर्स सीधे तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा के अधीन काम करेगी।
  • इस यूनिट पर तालिबान के रक्षा मंत्रालय या गृह मंत्रालय का कंट्रोल नहीं होगा।
  • यूनिट के सदस्यों को तालिबान के दूसरे लड़ाकों के मुकाबले ज्यादा वेतन और सुविधाएं मिलेंगी।
  • इस यूनिट में कोई जनरल सैनिक रैंक नहीं है। भर्ती ऑफिसर लेवल से शुरू होती है।

तालिबान के सूत्रों ने बताया कि यूनिट के ज्यादातर सदस्य कंधार, उरुजगन और हेलमंद प्रांतों से है, जबकि कुछ सदस्य जाबुल से भी लिए गए हैं। बताया जाता है कि इस यूनिट को अमेरिकी सेना के एडवांस मिलिट्री उपकरण दिए जाएंगे, जिसमें नाइट-विजन डिवाइस, गाड़ियां, ऑपरेशनल हेलिकॉप्टर और टोही ड्रोन शामिल हैं। अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से जाते समय अमेरिकी सेना इन उपकरणों को छोड़ गई थी, जिसे तालिबान ने अपने कंट्रोल में ले लिया है।

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