बालाघाट के साथ ही पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गोंदिया व भंडारा में सारस पक्षी के संरक्षण को लेकर संयुक्त रुप से कवायद की जा रही है। इस वर्ष इन तीनों जिलों में विलुप्त होती जा रहे सारस की संख्या का पता लगाने व इनका संरक्षण करने के साथ ही खेती में सहायक पक्षियों के प्रति आम जनमानस में प्रेम भाव की भावना जागृत करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र की सेवा संस्था, बालाघाट का वनविभाग व डीएटीसीसी विभाग के साथ ही प्रकृति प्रेमी 17 जून को गणना करेंगे। इसके लिए गुरुवार को वनविभाग के अरण्य सदन परिसर में कार्यशाला का आयोजन कर वन अमले को इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है।
जिले में चिन्हित किए गए 56 स्थान – साकरे
वनविभाग के एसडीओ प्रशांत साकरे ने बताया कि सारस पक्षी प्रकृति प्रेमी होने के साथ ही खेती में किसान की बड़ी सहायता करता है। वर्ष के दिनों में अंडे देने के दौरान ये पक्षी एक से ड़ेढ माह का समय खेत में गुजारता है। इस दौरान वह किसान की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाकर फसल काे सुरक्षत करता है। उन्होंने बताया कि बालाघाट जिले में नदियों के किनारे से लगे क्षेत्रों में सारस पक्षी पाए जाते है। जिनकी गणना करने के लिए जिले के समस्त विकासखंडों में 56 स्थान तय किए गए है। 17 जून को गणना के दिन सुबह पांच बजे से गणना के कार्य को शुरु किया जाएगा और इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
सालभर रखी जाती है निगरानी- बहेकर
सेवा संस्था के अध्यक्ष सावन बहेकार ने बताया कि भारत देश में इस पक्षी को वैवाहिक जीवन में पूरी निष्ठा व ईमानदारी के लिए जाना जाता है, क्योकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पक्षी अपने पूरे जीवनकाल में एक ही बार अपना जीवन साथी चुनता है। ऐसा भी माना जाता है कि सारस के जोड़े में से किसी भी एक की मौत हो जाती है तो बचा एक पक्षी पूरी जिदंगी अकेले की जीवन यापन करता है। ऐसी स्थिति में सारस के संरक्षण कर इसे बचाने के लिए प्रयास करना अतिआवश्यक है। उन्होंने बताया कि गणना सिर्फ एक दिन की नहीं है अपितु पूरे साल भर इन पक्षियों पर निगरानी रखी जाती है कि जिससे की किसी भी प्रकार की स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी देखभाल की जा सके।
पिछले वर्ष बालाघाट गोंदिया में मिले थे 79 सारस – अभय
बालाघाट के प्रकृति प्रेमी अभय कोचर ने बताया कि ये अच्छी बात है कि बालाघाट जिले में सारस की संख्या में लगातार बढोत्तरी हो रही है। पिछले वर्ष बालाघाट जिले में हुई गणना में इनकी संख्या में करीब 45 दर्ज की गई थी तो वहीं गोंदिया जिले में करीब 34 की संख्या में मिले थे लेकिन भंडारा जिले में इनकी स्थिति बिल्कुल भी नगण्य होती जा रही है क्योकि पिछली गणना में ये सिर्फ तीन की संख्या में ही मिले थे।










































