। राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों (रेसिडेंशियल एरिया) में संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। निगम ने 750 से ज्यादा ऐसे व्यावसायिक संस्थानों को अपना कारोबार बंद करने के लिए महज तीन दिन की मोहलत दी है।
तय समय सीमा के भीतर दुकानें या संस्थान न हटाने पर प्रशासन द्वारा सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नगर निगम की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से नाराज व्यापारी लामबंद हो गए हैं और आज वे इसके खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।750 संस्थानों को अल्टीमेटम, होगी सीलिंग की कार्रवाई
- नगर निगम अब तक रिहायशी इलाकों में चल रहे कमर्शियल संस्थानों को कुल 6,589 नोटिस जारी कर चुका है (रविवार तक 5,778 और सोमवार को 811 नोटिस)। नगर निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता ने बताया कि मंगलवार से 750 से ज्यादा संस्थानों को अंतिम चेतावनी पत्र (नोटिस) जारी किए जाएंगे।
- इनमें मुख्य रूप से शहर के पॉश इलाके अरेरा कॉलोनी, बावडिया कलां और रोहित नगर के 429 संस्थान शामिल हैं। यदि 3 दिन के ग्रेस पीरियड में गतिविधियां बंद नहीं की गईं, तो सीलिंग और अतिक्रमण हटाने की सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
संचालकों की दलीलें निगम ने की खारिज
- निगम द्वारा पूर्व में दिए गए नोटिस के जवाब में करीब 250 संचालकों ने अपना पक्ष रखा था। उनका तर्क था कि वे कमर्शियल टैक्स भर रहे हैं, उनके पास व्यावसायिक बिजली का कनेक्शन है और उनके भवन 18 मीटर चौड़ी सड़क पर बने हैं। लेकिन, नगर निगम के अधिकारियों ने इन सभी तर्कों को नकार दिया है।
- अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कमर्शियल टैक्स भरने या कमर्शियल बिजली कनेक्शन ले लेने से किसी आवासीय भवन का मूल उपयोग (लैंड यूज) नहीं बदल जाता।
सड़कों पर उतरे व्यापारी, की नियमितीकरण की मांग
- संस्थानों को बंद करने के फरमान के खिलाफ व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। वे मंगलवार सुबह 11 बजे रोशनपुरा चौराहे से एक रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
- व्यापारियों का तर्क है कि बीते सालों में कई आवासीय क्षेत्रों का स्वरूप बदल चुका है और वहां लंबे समय से व्यापार हो रहा है। एकदम से सीलिंग होने से न सिर्फ उनका कारोबार बल्कि आम लोगों की आजीविका और आवश्यक सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित होंगी।
व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि:
गुजरात राज्य में लागू ‘अनाधिकृत विकास नियमितीकरण कानून-2022’ की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एक नियमितीकरण नीति बनाई जाए, ताकि सालों से जमे व्यापारियों को राहत मिल सके।
प्रदेश में जल्द नया मास्टर प्लान लागू किया जाए, जिसमें ‘मिक्स लैंड यूज’ का स्पष्ट प्रावधान हो।










































