Child Marriage: बाल विवाह एक कुप्रथा है और इसके खिलाफ सामाजिक स्तर पर कई मुहिम चलाई गई हैं। सरकार ने भी बाल विवाह पर रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद छोटे-छोटे मासूम बच्चों को शादी जैसे जिम्मेदारी के बंधन में बांधने वाले बाज नहीं आ रहे। आज के आधुनिक युग में भी कुछ लोग 16वीं 17वीं सदी की परंपराओं को ढो रहे हैं। बाल विवाह का ताजा मामला मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से सामने आया है।
प्रशासन की नाक के नीचे हुआ बाल विवाह
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भोजपुर थाना क्षेत्र के कुशलपुरा गांव में सिर्फ 8 साल की मासूम बच्ची का विवाह 9 साल के बच्चे से कर दिया। यह मामला बिल्कुल वैसा ही है जैसे टीवी सीरियल Balika Vadhu में हुआ था, जिसमें 8 साल की बच्ची की शादी कर दी गई थी। इस मामले में हैरानी की बात ये है कि प्रशासनिक टीम जांच के लिए एक दिन पहले ही गांव में पहुंची थी। इसके बावजूद बाल विवाह की इस घटना को रोका नहीं जा सका।
शादी के वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई
बाल विवाह के इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब शादी की रस्मों (हल्दी, मेहंदी और बारात) के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की टीम हरकत में आई। महिला एवं बाल विवास परियोजना अधिकारी खिलचीपुर संतोष चौहान की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया गया। शिकायत मिलने पर थाना भोजपुर में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 10 और 11 के तहत केस दर्ज हुआ।
वीडियो वायरल होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंचीं। इस टीम में सेतोष चौहान और जिला समन्वयक रजनी प्रजापति भी शामिल रहीं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और गांव के चौकीदार के बयान के आधार पर बाल विवाह की पुष्टि हुई और पंचमाना तैयार किया गया।
पुलिस और प्रशासन के निगरानी तंत्र पर प्रश्न चिन्ह
जैसा कि हमने ऊपर बताया कि बाल विवाह से एक दिन पहले भी प्रशासन की टीम गांव में जांच के लिए पहुंची थी। इसके बावजूद दो छोटे बच्चों की आपस में शादी कर दी गई। टीम जब गांव में जांच के लिए पहुंची तो ग्रामीणों ने दूसरे दूल्हे की जानकारी देकर उन्हें गुमराह कर दिया। इसके अगले ही दिन बाल विवाह हो गया, इससे पुलिस और प्रशासन के निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ केस
पुलिस की हालत अब सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने जैसी है। बाल विवाह हो चुका है। अब पुलिस ने दूल्हे और दुल्हन के माता-पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में टेंट वाला, घोड़ी संचालक, प्रिंटिंग प्रेस संचालक, हलवाई और पंडित सहित अन्य सहयोगियों को भी आरोपी बनाया है। इस मामले में सभी के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है।
एक और बाल विवाह की तैयारी!
इस बीच करनवास थाना क्षेत्र में 9 साल की बच्ची के जल्द ही बाल-विवाह किए जाने का मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक सगाई के बाद आगामी 26 अप्रैल को विवाह तय किया गया है। परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस और महिला बाल विकास विभाग से की है। आज के दौर में बाल विवाह मामले इस तरह सामने आने से प्रशासनिक तैयारियों और जागरुकता अभियानों की सफलता पर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्पष्ट दिख रहा है कि लोग इस कुप्रथा से छुटकारा पाना नहीं चाहते और पुलिस प्रशासन ऐसी घटनाओं को पूरी तरह से रोकने में विफल हो रही है।










































