कीव: रूस और यूक्रेन के बीच चार सालों से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध का मैदान नाटकीय रूप से बदल रहा है। फरवरी 2022 में टैंक, तोपखाने और पैदल सेना के साथ शुरू हुआ यह सैन्य संघर्ष पर अब मशीनों का युद्ध बनता जा रहा है। अब रोबोट, ड्रोन और रिमोट से चलने वाले वाहन उन मिशनों को अंजाम दे रहे हैं, जिनके लिए हजारों सैनिकों की जरूरत पड़ती थी।
यूक्रेन की मशीनी सेना कर रही रूस का मुकाबला
इस युद्ध में सैनिकों की कमी से जूझ रहे यूक्रेन ने एक जबरदस्त बदलाव किया है। उसके युद्ध अभियानों का एक बड़ा हिस्सा अब मानवरहित हो गया है। सैनिकों की जगह यूक्रेनी सेना रोबोट, ड्रोन और दूर से कंट्रोल किए जाने वाले टैंकों से रूस का मुकाबला कर रही है, जिसने उसे अचानक बढ़त दिला दी है। युद्ध के सबसे खतरनाक अग्रिम मोर्चों पर तकनीक तेजी से सैनिकों की जगह ले रही है।जंग में रोबोट का हो रहा इस्तेमाल
यूक्रेनी सैन्य इकाइयां अब बारूद ले जाने वाले जमीनी रोबोट का इस्तेमाल करके हमले कर रही हैं। इन्हें युद्ध के मैदान से कई किलोमीटर दूर बैठे ऑपरेटर नियंत्रित करते हैं। अब ये मशीनी सेना इतनी ताकतवर हो चुकी है कि रूसी ठिकानों पर कब्जा कर रही है। इसी अप्रैल में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया कि पहली बार किसी रूसी ठिकाने पर रोबोट और ड्रोन की मदद से कब्जा किया गया।
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि जनवरी से अप्रैल के बीच यूक्रेन की मानवरहित मशीनों ने 22000 मिशन पूरे किए हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ये मशीनें धमाका करने से पहले खाइयों और पेड़ों की कतारों से होकर दुश्मन के पास पहुंचती हैं। रूसी सैनिकों ने इन रोबोट को साइलेंट डेथ नाम दिया है, क्योंकि अक्सर धमाका होने के ठीक पहले ही इनकी आवाज सुनाई देती है।










































