‘वो ब्रैंड नहीं व्यवहार देखते हैं’, श्रीधर वेम्बु ने बताया कैसे Zoho ने दुनिया के सबसे कठिन मार्केट में पाई कामयाबी?

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Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु, सोशल मीडिया पर कंपनी से जुड़ी जानकारियां साझा करते रहते हैं। चेन्नई से शुरू हुई टेक कंपनी का कामकाज आज दुनियाभर में फैला हुआ है। अमेरिका से लेकर चीन और जापान तक में जोहो के टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स को उपयोग किया जाता है। हालांकि इस सफलता तक पहुंचने के लिए श्रीधर वेम्बु और उनकी टीम ने कड़ी मेहनत की है। अपने नए सोशल मीडिया पोस्ट में वेम्बु साल 2001 की घटना का जिक्र किया है जब जोहो ने जापान में अपनी शुरुआत की। टेक दिग्गज ने लिखा कि जापान में लोग ब्रैंड नहीं आपका व्यवहार देखते हैं।

श्रीधर वेम्बु का सोशल मीडिया पोस्ट

श्रीधर वेम्बु ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत और अमेरिका के बाहर जापान हमारा पहला ऑफिस था। वह साल 2001 की बात है। श्रीधर वेम्बु के अनुसार, हाल ही में वह जापान के योकोहामा में कंपनी के ऑफिस गए। तब उन्हें याद आया कि 2001 में वह चेन्नई की एक छोटी और अनजान कंपनी थे। उन्हें दुनिया के सबसे कठिन मार्केट को चुना था। उनके अनुसार, जापान में कोई भी सिर्फ ब्रैंड या बड़ी-बड़ी बातों को देखकर चीजें नहीं खरीदता। वो यह देखते हैं कि जब कोई चीज खराब होती है या समस्या आती है, तब आपका व्यवहार कैसा रहता है। अगर आप सफल हो जाते हैं तो वे दशकों तक आपके साथ जुड़े रहते हैं। जापान के इसी धैर्य ने जोहो के इंजीनियरिंग कल्चर को गढ़ा, जो आज भी हमारे साथ है।

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