इन दिनों जिले के किसानों को फसल बीमा कराने के नाम पर फर्जी फोन कॉल किए जा रहे हैं। कॉल करने वाले लोग स्वयं को कृषि मंत्रालय भारत सरकार से जुड़ा बताकर किसानों से उनकी फसल और जमीन से संबंधित जानकारी मांग रहे हैं। फोन करने वाले पहले किसानों से उनके खेतों का खसरा नंबर पूछकर जमीन की पुष्टि करते हैं और फिर फसल बीमा कराने का झांसा देकर उनसे ओटीपी साझा करने के लिए कहते हैं। आशंका जताई जा रही है कि ओटीपी के माध्यम से किसानों के मोबाइल या बैंक खाते से ठगी करने का प्रयास किया जा सकता है। इस संबंध में संबंधित विभाग द्वारा किसानों के लिए अलर्ट जारी करते हुए स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार के फोन कॉल किसी भी शासकीय विभाग, मंत्रालय , कृषि विभाग की ओर से नहीं किए जा रहे हैं। ये पूरी तरह फर्जी कॉल हैं और ठग किसानों को फसल बीमा के नाम पर निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
जिले में इन दिनों साइबर अपराधियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। आए दिन अलग-अलग तरीकों से भोली-भाली जनता को ठगने के प्रयास किए जा रहे हैं। कभी नौकरी दिलाने का झांसा देकर तो कभी सोशल मीडिया के माध्यम से लुभावने प्रस्ताव देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है। अब साइबर ठगों ने जिले के किसानों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है और फसल बीमा कराने के नाम पर उनसे जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। बीते दो से तीन दिनों के भीतर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों को फोन कॉल प्राप्त हुए हैं। इन कॉल में कॉल करने वाले व्यक्ति खुद को कृषि मंत्रालय भारत सरकार से जुड़ा हुआ बताते हैं और किसानों से उनकी जमीन से संबंधित जानकारी मांगते हैं। सबसे पहले किसानों से उनके खेतों के खसरा नंबर की पुष्टि करवाई जाती है और यह भी पूछा जाता है कि उनकी जमीन पर इस समय कौन-सी फसल लगी हुई है। इसके बाद उनसे पूछा जाता है कि क्या वे अपनी फसल का बीमा करवाना चाहते हैं। कुछ किसानों ने इन कॉल करने वालों को कोई जानकारी नहीं दी, जबकि कुछ किसानों ने केवल सामान्य जानकारी साझा की। वहीं कुछ किसानों ने साइबर ठगों की बातों पर सहमति भी जताई, लेकिन जागरूक किसानों ने पूरे मामले की जानकारी संबंधित विभागों को दे दी। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि इस प्रकार की कॉल पूरी तरह फर्जी हैं और किसानों को फसल बीमा के नाम पर ठगने की कोशिश की जा रही है। ठग किसानों से बातचीत के दौरान ओटीपी की जानकारी हासिल करने का प्रयास भी कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ओटीपी प्राप्त कर साइबर अपराधी किसानों के मोबाइल या बैंक खातों तक पहुंच बनाकर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। अभी तक जिले के किसी भी क्षेत्र से इस तरह की कॉल के कारण बड़ी ठगी की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से लगातार कॉल किए जा रहे हैं, उससे यह खतरा बढ़ता जा रहा है कि भविष्य में किसान ठगी का शिकार हो सकते हैं।
फसल बीमा कराने के नाम पर आया कॉल
लालबर्रा क्षेत्र के किसान भूपेंद्र ने बताया कि 10 मार्च को उनके मोबाइल नंबर पर भी एक कॉल आया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उनसे पूछा कि इस समय उनके खेत में फसल क्यों नहीं लगी है। जबकि किसान भूपेंद्र के अनुसार उनके खेत में फसल लगी हुई थी। इस सवाल से उन्हें संदेह हुआ और उन्होंने थोड़ी देर बात करने के बाद कॉल काट दिया। इसके बाद उन्होंने अपने परिचितों से संपर्क कर इस घटना की जानकारी साझा की, तब उन्हें पता चला कि यह कॉल फर्जी था ।
खसरा नंबर बताकर करते हैं भरोसा
कुछ किसानों ने यह भी बताया कि कॉल करने वाले लोग पहले किसानों के खेतों से संबंधित खसरा नंबर बताते हैं और उनसे पुष्टि करवाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि उनके द्वारा बताया गया खसरा नंबर सही होता है, जिससे किसानों को भरोसा हो जाता है। इसके बाद वे फसल बीमा कराने की बात करते हैं और मोबाइल पर आने वाला ओटीपी मांगते हैं। हालांकि अभी तक जिले में इस प्रकार के कॉल के चलते किसी किसान के साथ ठगी की बड़ी घटना सामने नहीं आई है।
किसान भाई सतर्क और सावधान रहें – फूलसिंह मालवीय
इस संबंध में फूलसिंह मालवीय, उपसंचालक, कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल करने वाले व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी, मोबाइल पर आने वाला वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) साझा न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी भी विभाग द्वारा किसानों को फसल बीमा के लिए इस प्रकार के फोन कॉल नहीं किए जा रहे हैं। उपसंचालक ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस प्रकार की कॉल से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल की जानकारी तुरंत संबंधित पुलिस को दें, ताकि समय रहते ऐसी साइबर ठगी पर रोक लगाई जा सके।










































