जिले में बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले, फर्जी लिंक से मोबाइल हैक

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जिले में इन दिनों साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। शासन की योजनाओं, परीक्षा परिणाम और रसोई गैस बुकिंग जैसे जरूरी विषयों का सहारा लेकर ठग मोबाइल उपयोगकर्ताओं को फर्जी लिंक और एप्लीकेशन भेज रहे हैं। इन लिंक पर क्लिक करते ही न केवल मोबाइल हैक हो रहा है, बल्कि यूजर्स के बैंक खातों तक पर खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में शहर में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक मोबाइल यूजर को रसोई गैस बुकिंग के नाम पर एक एप्लीकेशन लिंक प्राप्त हुआ। यूजर ने इसे अपने परिचित द्वारा भेजा गया समझकर क्लिक कर लिया। इसके तुरंत बाद उसका मोबाइल हैक हो गया और उसके फोन में सेव सभी संपर्कों को वही लिंक स्वतः भेजा जाने लगा। हालांकि कुछ जागरूक लोगों ने इस लिंक को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन कई लोग इसके झांसे में आ गए और उनके मोबाइल भी हैक हो गए।

जानकारों के अनुसार, साइबर ठग अब लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और वर्तमान समस्याओं को समझकर ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। हाल ही में रसोई गैस की उपलब्धता और बुकिंग से जुड़ी दिक्कतों को देखते हुए ठगों ने इसी विषय को हथियार बना लिया है। गैस बुकिंग या सिलेंडर भरवाने के नाम पर फर्जी एप और लिंक भेजे जा रहे हैं, जिन पर क्लिक करते ही मोबाइल की सुरक्षा भेद दी जाती है। पीड़ित यूजर को तब इस ठगी का अहसास हुआ, जब उसके एक परिचित ने फोन कर पूछा कि वह इस तरह के संदिग्ध मैसेज क्यों भेज रहा है। इसके बाद उसे समझ आया कि उसका मोबाइल हैक हो चुका है। उसने तत्काल इस संबंध में पुलिस को सूचना दी। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लुभावने ऑफर, फर्जी स्कीम, और अब तो एआई तकनीक का उपयोग कर चेहरे बदलने जैसे तरीकों से भी ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई मामलों में लोगों के बैंक खातों से रकम भी पार हो चुकी है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई पीड़ित शिकायत तक दर्ज नहीं करा पाते। जिले में लगातार बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि जागरूकता की कमी अब भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। आम नागरिक अनजाने में फर्जी लिंक पर क्लिक कर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। वैसे तो किसी भी अनजान लिंक, एप्लीकेशन या संदिग्ध मैसेज पर क्लिक करने से बचें। केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत एप के माध्यम से ही सेवाओं का उपयोग करें। इसके साथ ही, मोबाइल में आए ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन साइबर सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि आमजन इन ठगी के तरीकों को पहचान सकें और सुरक्षित रह सकें।

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