पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी क्षेत्र में अवैध रूप से सूदखोरी का काला कारोबार करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफ ोड़ करते हुए वारासिवनी पुलिस ने आरोपी सुनील अरोरा को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से उन सैकड़ों लोगों को राहत मिली है जो आरोपी के बिछाए ऋ णजाल में फंसकर अपना सब कुछ गंवा चुके थे। इसमें पुलिस के द्वारा आरोपी के पास से कई प्रकार के संदिग्ध एवं संवेदनशील दस्तावेज भी बरामद किए हैं। जिसे ८ मई को वारासिवनी न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। उक्त मामले का खुलासा पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के द्वारा प्रेस वार्ता लेकर किया गया।
सोची समझी साजिश के तहत शोषण
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपी सुनील पिता प्रीतमलाल अरोरा उम्र ४५ वर्ष निवासी वार्ड नं.७ लालबर्रा रोड़ एक सुनियोजित कार्यप्रणाली के तहत लोगों को अपना शिकार बनाता था। आरोपी मजबूर लोगों को ५ से १० प्रतिशत जैसी अत्यधिक ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज देता था। जब पीडि़त कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाता तो वह डरा.धमकाकर उनका आर्थिक और मानसिक उत्पीडऩ शुरू कर देता था।
अपराध का तरीका चेक बाउंस के झूठे मुकदमों का डर
आरोपी केवल ब्याज नहीं वसूलता था बल्कि वह पीडि़तों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके एटीएम कार्ड पासवर्ड सहित, हस्ताक्षरित कोरे चेक, कोरे स्टांप पेपर और जमीन की रजिस्ट्री जैसे मूल दस्तावेज अवैध रूप से अपने कब्जे में रख लेता था। इतना ही नहीं आरोपी कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए पीडि़तों के हस्ताक्षरित चेक को बैंक में डालकर खुद या अन्य माध्यमों से चेक बाउंस के झूठे मुकदमे दर्ज करवाता था। इस दबाव में आकर कई आवेदक अपनी कीमती जमीन कम दामों में बेचने को मजबूर हो जाते थे और उस राशि को भी आरोपी ब्याज के नाम पर खुद रख लेता था।
पुलिस की छापेमारी में जब्त दस्तावेजों का अंबार
विवेचना के दौरान आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में बैंक और संपत्ति संबंधी दस्तावेज बरामद किए गए हैं जो उसके अवैध कारोबार की गहराई को दर्शाते हैं। इसमें ब्लैंक चेक १५३ नग, ऋण पुस्तिका १५ नग, जमीन की रजिस्ट्री दस्तावेज १५ नग, कोरे स्टांप पेपर विभिन्न राशियों वाले २२ नग, हस्ताक्षरयुक्त कोरे कागज ७ नग सहित अन्य दस्तावेज जैसे जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड की प्रतियां, एटीएम कार्ड, एलआईसी बॉन्ड, २ मोबाइल फ ोन और एक चार पहिया वाहन को पुलिस के द्वारा बरामद कर जप्त किया गया है।
यह हुई कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक १८३/२६ के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा ३०८,५ और ३१६,२ एवं म.प्र. ऋ णियों का संरक्षण अधिनियम १९३७ की धारा ३/४के तहत मामला पंजीबद्ध किया है। वर्तमान में आरोपी पुलिस रिमांड पर है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस को अंदेशा है कि इस मामले में अभी और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस ने अपील की हैं की यदि कोई अन्य व्यक्ति भी इस सूदखोर के उत्पीडऩ का शिकार हुआ है तो वह निडर होकर पुलिस से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
सुनील अरोरा गरीब एवं शासकीय कर्मचारी को सूदखोरी के रैकेट में फ साया जा रहा था-आदित्य मिश्रा
पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि गरीब एवं शासकीय कर्मचारी को सूदखोरी के रैकेट में फसाया जा रहा है। मुख्य आरोपी सुनील अरोरा ६ वर्ष से अत्यधिक ऋ ण वसूली कर रहे थे तो इसका सत्यापन कर अपराध दर्ज कर गिरफ्तार किया गया। रिमांड पर लेकर उनके घर और दुकानों सहित विभिन्न ठिकानों पर छापा मारकर दस्तावेज एकत्रित किए गए। यह नगद रूपये देते थे लोगों से ब्लैंक चेक उनका और उनकी पत्नी दोनों का लेते थे उनसे स्टांप भी खरीदवाते थे ताकि कभी कुछ हो तो फ र्जी इबादत लिखी जा सके। पूरा ऋ ण देने पर भी लोगों की ऋ ण पुस्तिका यह अपने पास रखते थे उनके पास से जमीन की रजिस्ट्री भी मिली है जो उनके सहयोगी लेमन वाडीवा के नाम पर जमीन खरीदने का भी काम कर रहे थे। शासकीय नियम के तहत सीलिंग लिमिट से ज्यादा जमीन होने पर आदिवासी गैरआदिवासी को जमीन बेच सकता है उसका यह फायदा ले रहे थे। ६ रजिस्ट्री लेमन और उनकी पत्नी मंजू वड़ीवा के नाम पर थी। जिसे उन्होंने भेजा है इन्होंने लोगों के एटीएम और उनका पिन रख लिया था सैलरी आते ही राशि निकाल लेते थे। अभी इन्हें हमने रिमाड में लिया है ९ से १० बैंक खाते प्राप्त हुए हैं जिसके ट्रांजैक्शन की जांच करना है कई प्रकार के दस्तावेज जिनके पास मिले हैं जिनका वेरिफिकेशन करना है। आदिवासी से आदिवासी को जमीन बेचना आसान है इसलिए यह लेमन के नाम पर जमीन करवा रहे थे।










































