जिले के जंगलों में इन दिनों तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन इस बार जंगलों में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। कहीं मोबाइल पर पुराने गीत बज रहे हैं तो कहीं रेडियो की आवाज जंगलों में गूंज रही है। यह कोई मनोरंजन नहीं, बल्कि वन विभाग की नई सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। वन विभाग ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को जंगल में मोबाइल और रेडियो के माध्यम से गीत-संगीत बजाते हुए तेंदूपत्ता तोड़ने की सलाह दी है, ताकि हिंसक वन्यप्राणियों के हमलों से बचा जा सके।
हर वर्ष तेंदूपत्ता सीजन के दौरान जंगलों में भालू, बाघ और तेंदुए जैसे वन्यप्राणियों के हमले की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई बार तेंदूपत्ता तोड़ने गए ग्रामीण घायल हो जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में जान तक चली जाती है। इसी खतरे को कम करने के उद्देश्य से इस बार उत्तर वन मंडल बालाघाट सामान्य ने यह नया प्रयोग शुरू किया है। वन विभाग का मानना है कि जंगल में लगातार गीत-संगीत या मानवीय गतिविधियों की आवाज सुनकर वन्यप्राणी पहले से सतर्क हो जाते हैं और इंसानों के करीब आने की बजाय दूसरी दिशा में चले जाते हैं। इससे अचानक आमना-सामना होने की संभावना कम हो जाती है और मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को रोका जा सकता है। इस प्रयोग को लागू करने से पहले वन विभाग ने गांव-गांव जाकर चौपाल आयोजित की। अधिकारियों और कर्मचारियों ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को जंगल में सुरक्षित तरीके से काम करने की जानकारी दी। ग्रामीणों को समझाया गया कि वे अकेले जंगल में न जाएं, समूह में कार्य करें, अंधेरे में जंगल में प्रवेश न करें और मोबाइल या रेडियो के जरिए लगातार आवाज बनाए रखें। वन विभाग ने यह भी बताया कि जंगल में लंबे समय तक सन्नाटा रहने पर वन्यप्राणी इंसानों के बेहद करीब तक आ जाते हैं, लेकिन यदि पहले से मानव गतिविधियों की आवाज आती रहे तो वे दूरी बनाए रखते हैं। उत्तर वन मंडल बालाघाट सामान्य के अंतर्गत इस वर्ष सात परिक्षेत्रों , उत्तर लामता, दक्षिण लामता, उत्तर उकवा, दक्षिण उकवा, पश्चिम बैहर, पूर्व बैहर और बिरसा दमोह सामान्य क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण किया जा रहा है। इन क्षेत्रों से जुड़े लगभग कई गांवों के लोग इस कार्य में लगे हुए हैं। उत्तर वन मंडल के अधिकांश जंगल कान्हा टाइगर रिजर्व के कॉरिडोर क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां बड़ी संख्या में भालू, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में हर साल तेंदूपत्ता तुड़ाई के दौरान खतरा बना रहता है। इसी कारण विभाग ने पारंपरिक व्यवस्था से हटकर यह नई रणनीति अपनाई है। इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में महिलाओं की भूमिका भी बढ़ाई गई है। कई जगह पुरुषों की बजाय महिलाओं को संग्राहक समूहों का मुखिया बनाया गया है। संग्राहक कार्ड भी महिलाओं के नाम से जारी किए गए हैं और तेंदूपत्ता की राशि व बोनस सीधे उनके बैंक खातों में जमा किए जाएंगे। वन विभाग का मानना है कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी। तेंदूपत्ता संग्रहण वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन माना जाता है। वन विभाग ने संग्राहकों को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। लोगों से कहा गया है कि वे सुबह उजाला होने के बाद ही जंगल जाएं, अकेले कार्य न करें, बच्चों को साथ न ले जाएं और किसी भी वन्यप्राणी के दिखने पर घबराने की बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखें। फिलहाल जंगलों में गीत-संगीत के सहारे तेंदूपत्ता तुड़ाई का यह अनोखा प्रयोग लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और वन विभाग इसे वन्यप्राणी-मानव संघर्ष रोकने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मान रहा है।










































