बीएसएफ भर्ती में बड़ा फर्जीवाड़ा, यूपी और भिंड के युवकों ने बालाघाट के पते पर बनवा लिए फर्जी वोटर आईडी और EWS सर्टिफिकेट

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बालाघाट: जिले में सीमा सुरक्षा बल की भर्ती परीक्षा में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े और संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश और मप्र के भिंड जिले जैसे बाहरी क्षेत्रों के अभ्यर्थियों ने कथित सिंडिकेट से सांठगांठ कर खुद को बालाघाट का मूल निवासी घोषित कर दिया।

प्रशासनिक और बीएसएफ की संयुक्त जांच में अब तक 10 अभ्यर्थियों के मूल निवास, जाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी और अवैध पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

बीएसएफ की टीम ने घर-घर जाकर किया भौतिक सत्यापन

इस सुनियोजित घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पूर्व भाजयुमो जिला अध्यक्ष गजेंद्र भारद्वाज की शिकायत पर एसडीएम गोपाल सोनी के नेतृत्व में बीएसएफ के अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर जांच शुरू की। टीम ने प्रमाण पत्रों में दर्ज लालबर्रा, किरनापुर और लांजी जैसे क्षेत्रों के पतों पर जाकर मकान मालिकों और पड़ोसियों से पूछताछ की।

जांच के दौरान जैसे ही सिंडिकेट को भनक लगी, उन्होंने स्थानीय मकान मालिकों को पैसों का लालच देकर गवाह खरीदने और झूठे बयान दिलाने की कोशिश की। लेकिन बीएसएफ की सख्ती के आगे स्थानीय लोगों ने इन बाहरी अभ्यर्थियों को पहचानने से साफ मना कर दिया, जिससे पूरा सिंडिकेट बेनकाब हो गया।

वोटर आईडी तक बना डाले, एफआईआर की तैयारी

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने केवल डिजिटल सर्टिफिकेट ही नहीं, बल्कि इन बाहरी लड़कों के बालाघाट के पतों पर फर्जी वोटर आईडी कार्ड भी तैयार करवा लिए थे। दरअसल, बालाघाट और डिंडौरी जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के युवाओं को सुरक्षा बलों की भर्ती में नियमों और शारीरिक मापदंडों में विशेष छूट मिलती है, जिसका फायदा उठाने के लिए यह जाल बुना गया। फिलहाल, प्रशासन शेष संदिग्ध दस्तावेजों की स्क्रूटनी कर रहा है और जल्द ही इस अंतरराज्यीय रैकेट के खिलाफ स्थानीय पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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