शिक्षा का मंदिर या वसूली का जरिया? ,लूट का अड्डा साबित हो रहे प्राइवेट स्कूल

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पदमेश न्यूज़,बालाघाट।लगातार बढ़ रही महंगाई का असर अब बच्चों की कॉपी -किताबों और शिक्षा पर भी पड़ने लगा है।जहा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से शिक्षा विभाग भी अछूता नहीं रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार कॉपिया 50 फीसदी तक महंगी हुई हैं, तो वहीं रबर, पेंसिल और शॉर्पनर के दामों में भी 10 से 20 फीसदी का इजाफा देखने को मिल रहा है।आपको बता दें कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस,सब्जी भाजी, सहित अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के बाद अब कॉपी किताबो – के दाम 35 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा नया शिक्षण सत्र शुरू होने से इनकी मांग काफी ज्यादा आने से बाजार में कॉपी किताब की भी कमी बनी हुई है।जिससे बच्चो के अभिभावक काफी परेशान है।तो वही ड्रेस कॉपी किताब स्टेशनी, बैग, जूते, मोजे की खरीदी के लिए निजी स्कूलों ने अपनी अपनी दुकानें फिक्स कर दी है।जहां कॉपी किताब सहित शिक्षण से जुड़ी प्रत्येक सामग्री में निजी स्कूलों का कमीशन फिक्स होने के चलते इनके दामो में भारी इजाफा देखा जा रहा है।उधर जिले भर में चल रही इस सरेआम लूट पर सम्बधित विभाग व जिला प्रशासन का कोई ध्यान नही है।जिसके चलते बच्चो के अभिभावक अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे है।

मंहगाई की ट्रिपल मार झेल रहे अभिभावक
पहले से स्कूली फीस की मार झेल रहे पेरेंट्स, इस साल कॉपी किताबो की बढ़ी हुई कीमतों से परेशान है। ऐसे में कॉपी किताबो के दामों में बढ़ोत्तरी का असर लोगों की जेब पर दिखने लगा है।नया शैक्षिक सत्र शुरू होते ही कॉपी किताबों ड्रेस, जूता आदि के कीमत में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हो गयी है। ऐसे में अभिभावकों की दिक्कत काफी बढ़ती दिख रही है। इसके अलावा स्कूली बैग की कीमत में सौ से डेढ़ सौ रुपये का इजाफा हुआ है। जीएसटी सहित फुटवियर स्कूल शूज की कीमतों में 150 रुपये तक का इजाफा देखा जा रहा है।बात अगर वर्तमान समय की करे तो पेट्रोल डीजल रसोई गैस, हरी सब्जियों ,अन्य खाद्य प्रदार्थो के बाद अब महंगे दामो में स्कूली समाग्री खरीदने वाले अभिभावक मंहगाई की ट्रिपल मार झेलने को मजबूर है।

महंगाई की मार से शिक्षा भी अछूती नहीं
नए शिक्षण सत्र की शुरुवात होते ही महंगाई की मार से शिक्षा भी अछूती नहीं रही है। पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष शिक्षण सामग्री, ड्रेस और स्कूलों की एक्टिविटी सामग्रियों भी बढ़ोत्तरी हुई है। एक तरफ सरकार मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम बनाकर पालकों के आर्थिक बोझ को कम करना चाह रही है। वहीं शासकीय स्कूलों में निजी स्कूल जैसी सुविधाएं नहीं होने से अभिभावक और बच्चें निजी स्कूलों में मोटी फीस देकर एडमिशन लेने में अधिक रूचि दिखा रहे हैं।

कार्यवाही के चलते नही बढाई फीस, तो कमीशन बढाकर कमा रहे राशि
करीब 2 वर्ष पूर्व प्रशासन की ओर से निजी स्कूलों की फीस वसूली पर कार्यवाही की गई थी।इसलिए इस वर्ष फीस तो नही बढ़ी। लेकिन स्कूल वालो ने शिक्षण सामग्रियों में कमीशन बढाकर अपना पिछला घाटा पूरा कर लिया है।तो वही पिछली बार की अपेक्षा इस वर्ष अधिक शिक्षण समाग्री अभिभावकों से ख़रीदवाकर स्कूल संचालक अभिभावकों को लूटने में जरा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।

स्कूल संचालकों की मनमानी
अभिभावक अपने बच्चे को अच्छे और महंगे स्कूल में पढऩे की जिद में आकर स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। जिद के सामने निजी स्कूल में बच्चों का दाखिला करवा रहे हैं। स्कूल संचालक मनमानी कर कई तरह के नियम बताकर अधिक रुपए वसूल रहे हैं।अभिभावकों के मुताबिक शहर के ऐसे स्कूल जहां टाई और बैंच स्वयं के पास से मुहैया कराई जाती है। बदले में संचालक दोगुने दाम वसूलते हैं। उनका बच्चा बालाघाट के एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अध्यनरत है। स्कूल में लगने वाली टाई और बेच का बाजारी मूल्य 65 से 70 रुपए है, वही लंबी टाई और बेच का शुल्क 100 रु, इसके अलावा स्कूलों से खरीदने पर भी संचालक टाई और बैच के दोगुने दाम लेकर ठगी कर रहे है। मार्केट की कई दुकानों में स्कूल का नाम लिखा बैच और टाई नहीं मिलने से पालकों को मजबूरन स्कूल से ही खरीददारी करनी पड़ रही है। तो वही जिन दुकानों में स्कूलों का नाम लिखी टाई, बेंच और बेल्ट मिल रहे है।उसका एक निश्चित कमीशन का पैसा सीधे स्कूल पहुच रहा है।

स्कूली सुविधाओं के नाम पर लूट
प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के नाम पर मनमाना डोनेशन लिया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों के लिए साधन और सुविधाएं भले ही पर्याप्त न हों, लेकिन एडमिशन और शिक्षण फीस और अन्य एक्टिविटी के नाम पर जमकर लूट की जा रही है। उधर स्कूल वैन, बस, रिक्शा, ऑटो आदि का किराया भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ चुका है।इसके अलावा शहर के कुछ प्रतिष्ठित निजी स्कूलों में कम्प्यूटर, खेल और अन्य कोर्सो के नाम पर हजार रुपए तक अधिक लिए जा रहे हैं।

अन्य सुविधाओं के नाम पर वसूल रहे अतिरिक्त शुल्क
उधर स्कूलों में पेन्टिंग, खेल और अन्य प्रकार के नए कोर्स शुरु कर दिए है। इनके लिए अलग से कापी, किताब खरीदनी पड़ रही है। इस कारण पालको को 50 से 60 रुपए का अतिरिक्त खर्चा वहन करना पड़ रहा है।वही निजी स्कूल संचालक खेल, कम्प्यूटर और अन्य तरह की फीस वसूल कर ठगी कर रहे है। छोटे बच्चों से भी कम्प्यूटर की फीस ली जा रही है।उधर निजी स्कूलों ने दुकान संचालको से समझौता कर ड्रेस बेचने की परमिशन दी है।लेकिन दुकानदार अभिभावकों को अधिक मूल्य में ड्रेस वितरित कर रहा है।अन्य दुकानों में ड्रेस नहीं मिलने से मजबूरन वहीं से ड्रेस लेनी पड़ रही है।

निजी शिक्षण संस्थान ,सरकारी आदेशों की उड़ा रहे धज्जियां
हर वर्ष शिक्षण संस्थानों के खुलने के पूर्व सरकार द्वारा स्कूली किताबों यूनिफॉर्म सहित शिक्षण शुल्क को लेकर गाइड लाइन जारी कर निजी शिक्षण संस्थानों को आदेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं और आदेश के उल्लंघन पर कड़ी कार्यवाही की चेतावनी दी जाती हैं लेकिन शासन की ये चेतावनी हर बार निजी शिक्षण संस्थानों के लिए महज कोरी भभकी बनकर रह जाती हैं और ये निजी शिक्षण संस्थान शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं।

किताबें और ड्रेस के लिए निर्धारित की दुकानें-
स्कूल प्रबंधन द्वारा वाट्सएप चैट पर अभिभावकों को ग्रुप मैसेज भेजे जा रहे हैं। जहा स्कूल की कॉपी किताबें कहा से लेना है, ड्रेस कौन सी दुकानों में मिलेंगी, यहां तक कि उन दुकानों का एड्रेस व फोन नंम्बर तक लिखा जा रहा है।उधर दुकानों में स्कूल और कक्षा का नाम बताते हुए दुकानदार पूरा का पूरा बंच उठाकर रख देता है।उसे पहले से मालूम होता है कि इस साल कौन से स्कूल में कौन कौन सी कॉपी किताब लग रही है।
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ये है कापियों की दाम
कक्षा पिछले वर्ष इस वर्ष
केजी 1 290 420
केजी 2 290 430
पहली 345 465
दूसरी 330 480
तीसरी 360 500
चौथी 400 550
पांचवीं 450 590

ये है यूनिफार्म के दाम
कक्षा पिछले वर्ष इस वर्ष
केजी 1 300-350 380-400
केजी 2 300-350 380-400
पहली 350-380 395-430
दूसरी 350-380 430-450
तीसरी 400-450 530-570
चौथी 400-450 530-580
पांचवीं 500-530 600-650
शहर की के प्रतिष्ठित दुकान से यह जानकारी मिली है।
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