विशेष न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम की अदालत का फैसला
बालाघाट
विद्युत अधिनियम के विशेष न्यायाधीश गौतम सिह मरकाम की अदालत ने हत्या के एक मामले में आरोपी नेमीचंद पिता ओमकार शरणागत 37 वर्ष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बैहर थाना क्षेत्र में आने वाले ग्राम तुमड़ीभाट निवासी इस आरोपी के विरुद्ध अपनी पत्नी पुष्पलता की एक साजिश के तहत विद्युत करंट से हत्या करने का आरोप था विद्वान अदालत ने इस आरोपी को आजीवन कारावास के अलावा 7 हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किए हैं।
झाड़ियां में मिली थी पुष्प लता की लाश
अभियोजन के अनुसार 22 मार्च 2024 को सुबह ग्राम तुमड़ीभाट शासकीय स्कूल के आगे महुआ के पेड़ के पास झाड़ियां में एक महिला की लाश देखी गई थी इसके आसपास करंट के तार जले हुए दिखे रहे थे। खबर फैलते गांव के वहां पर पहुंच गए महिला की पहचान पुष्पलता शरणागत के नाम से की गई जिसकी करंट लगने से मौत होने की संभावना व्यक्त की गई। मृतिका की पुत्री आरशी शरणागत मौके पर पहुंची और उसे आरोपी नेमीचंद द्वारा पत्नी पुष्पलता की विद्युत करंट से मारकर हत्या करने जानकारी दी गई थी। जिसने बैहर थाना में रिपोर्ट की गई थी। जहां मर्ग जांच उपरांत यह घटना सामने आई थी। नेमीचंद तुमड़ीघाट में अपनी पत्नी पुष्पलता और बच्चों के साथ ग्राम तुमड़ीभाट में रहता था और वह इलेक्ट्रिशियन का कार्य करता था जबकि उसकी पत्नी पुष्पलता घर के सामने छोटी सी किराना दुकान चलती थी और सिलाई का काम भी करती थी।
अवैध संबंध के शक में रची खौफनाक साजिश
पुष्पलता को अपने पति नेमीचंद पर शक था कि उसका अवैध संबंध मंजूलता से है। नेमीचंद ने अपनी पत्नी पुष्पलता को रास्ते से हटाने के लिए उसे जान से मारने की योजना बनाई। 21 मार्च 2024 को दिन के 2:30 बजे से 3:00 बजे के मध्य नेमीचंद ने असाटी प्लाईवुड एवं हार्डवेयर कम्पाउंडरटोला बैहर की दुकान से 1 किलो लोहे का सेंटरिंग तार और दो गुच्छी लाइन डोरी रेशम का सफेद धागा लिया और अपनी पत्नी पुष्प लता की हत्या करने के आशय से उसने महुआ झाड़ के पास झाड़ियां में लपेटकर बिछा दिया और तार के एक छोर को रेशम के सफेद धागे से बांधकर 11 के व्ही विद्युत लाइन के ऊपर से धागा निकालकर रोड किनारे बारहमासी में बांध दिया और घर आकर खाना खाने के पश्चात पत्नी पुष्पलता से कहा कि वह रात 10:30 बजे महुआ झाड़ के पास मंजूलता को बुला रहा है। वहा चलकर अपने मन का समाधान कर ले। और उसने पुष्प लता से कहा कि जब तक मंजूलता ना आए वह झाड़ियों में जाकर छुपी रहे। जैसे ही पुष्प लता झाड़ियां के पास गई तभी आरोपी नेमीचंद ने रेशम के धागे को खींचकर लोहे के सेंटरिंग जी आई तार को 11 के व्ही विद्युत लाइन से जोड़ दिया। जिसके करंट के चपेट में आने से पुष्पलता को करंट लगा और उसकी वही मौत हो गई। तार में फाल्ट आने से वहां पर अंधेरा हो गया। इसके बाद आरोपी नेमीचंद ने वहां से भाग कर घर में आकर सो गया। और दूसरे दिन 22 मार्च को सुबह घटना में प्रयुक्त सामग्री को घर में लाकर छिपा दिया और बैहर चला गया। इसके बाद शासकीय स्कूल के आगे महुआ के पेड़ के पास पुष्प कला की लाश बैहर पुलिस द्वारा बरामद की गई।
नेमीचंद को किया गया गिरफ्तार:अदालत ने सुनाई सजा
मर्ग जांच उपरांत इस मामले में नेमीचंद के विरुद्ध धारा 302 और 201 भादवि के तहत अपराध दर्ज किया गया और इस अपराध में उसे गिरफ्तार किया गया और विवेचना अनुसंधान उपरांत विद्वान अदालत में अभियोग पत्र पेश किया गया था। यह मामला बालाघाट के विद्युत अधिनियम के विद्वान विशेष न्यायाधीश गौतम सिह मरकाम की विद्वान अदालत में चला। जहां अभियोजन पक्ष आरोपी नेमीचंद के विरुद्ध आरोपित अपराध सिद्ध करने में सफल रहा। जिसके परिणाम स्वरूप विद्वान अदालत में मामले की समस्त परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी नेमीचंद शरणागत को पत्नी की हत्या करने के आरोप में दोषी पाते हुए उसे धारा 302 भादवि के तहत आजीवन कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड और धारा 201 भादवि के तहत 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किये। इस मामले में शासन की ओर से प्रभावी पैरवी अतिरिक्त लोक अभियोजक प्रदीप सोनी द्वारा की गई थी।










































