इंदौर के एमवायएच के बंद गेट खुलेंगे या नहीं, सितंबर के पहले सप्ताह में हो सकता है फैसला

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। पिछले 10 माह से बंद एमवायएच के बंद गेट खुलेंगे या नहीं, सितंबर के पहले सप्ताह में यह फैसला हो सकता है। इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने शासन से कहा है कि वह गूगल इमेज पेश करे। इन फोटोग्राफ को देखने के बाद ही कोर्ट तय करेगी कि ये बंद गेट खोले जाएंगे या नहीं।

हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका पूर्व पार्षद महेश गर्ग ने दायर की है। इसमें कहा है कि एमवायएच अस्पताल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। इंदौर ही नहीं आसपास के कई जिलों से मरीजों को यहां उपचार के लिए लाया जाता है। कई निजी अस्पताल भी हालत अत्यंत गंभीर होने पर मरीजों को यहां रैफर करते हैं।एमवायएच पहुंचने के लिए चार गेट हैं, लेकिन सिंतबर 2025 से तीन गेट पर अस्पताल प्रबंधन ने ताला जड़ दिया है। इस वजह से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। गंभीर मरीजों को लंबा चक्कर लगाकर मुख्य गेट से ले जाना पड़ रहा है। इसके चलते कई बार मरीजों का जीवन संकट में पड़ जाता है।

अस्पताल प्रबंधन कह रहा है कि सुरक्षा की दृष्टि से गेट बंद किए गए हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन सुरक्षा के नाम पर हर वर्ष मोटी राशि खर्च करता है। उसे गेट बंद करने के बजाय वहां सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करनी चाहिए थी।

यह है गेट बंद करने की वजह

दरअसल अगस्त 2025 के अंतिम सप्ताह में अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एनआइसीयू में भर्ती दो नवजात को चूहों ने कुतर लिया था। इस घटना से आक्रोशित जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) के कार्यकर्ताओं ने कई दिन तक एमवायएच के मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन किया था। इन्हीं कार्यकर्ताओं का परिसर में प्रवेश रोकने के उद्देश्य से एमवायएच के तीन गेट बंद कर दिए गए थे। इसके बाद से ये गेट बंद ही हैं।

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