मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है’, पी चिदंबरम का ऐलान, बयान से सियासत हुई गर्म

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P Chidambaram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवाद पर दिए बयान को लेकर सियासत गर्मा गई है। इसे लेकर कांग्रेस नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ऐलान किया कि मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है। चिदंबरम में एक्स पर अपना बयान पोस्ट किया है। चिदंबरम के बयान से सियासत और गर्म होने की संभावना है।

बीजेपी ने बोला हमला

इसे लेकर अब बीजेपी कांग्रेस, राहुल गांधी और चिदंबरम पर हमलावर है। BJP प्रवक्ता ने कांग्रेस हेडक्वार्टर में नया वंदे मातरम गाना चलाने के दौरान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के आपत्ति जताए जाने का मुद्दा उठाया। इसे दिमागी नक्सल करार देते हुए बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम की दूसरी पंक्ति चलने के दौरान इसे रोकने का इशारा करती हैं। वह इस दौरान काफी गुस्से में नजर आती हैं। फिर वह राहुल की तरफ देखती हैं और गुस्सा जाहिर करती हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि भारत का उदघोष हो रहा था, वंदे मातरण का उदघोष हो रहा था। जब इनकी रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं तो ये विरोध क्यों नहीं करते।

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए नक्सलवाद और माओवाद को समाज के लिए बड़ा अभिशाप बतायाथा। उन्होंने कहा कि चार दशकों तक नक्सलवाद ने देश के बड़े हिस्से को जकड़कर रखा, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य तबाह हुआ और 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। जंगलों में ‘हथियारी नक्सल’ के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास का तिरंगा लहरा रहा है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ का खतरा बना हुआ है। ये तत्व समाज में हिंसा और अराजकता फैलाने के नए मौके तलाश रहे हैं, जिन्हें पहचानकर अलग-थलग करना और युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।पीएम मोदी ने कहा कि हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। 21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना जरूरी है। नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया है, अनेक माताओं के नवजातों को छीन लिया, मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। उन्होंने कहा कि इस नक्सलवाद ने चार दशक तक हिंदुस्तान की बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबोच रखा था, संविधान की धज्जिया उड़ा दी थी। देश के नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा सुरक्षाबल के जवान शहीद हो गए। युद्ध के अंदर जितने जवान मरते हैं, उतने जवानों को जान गंवानी पड़ी। नक्सलवाद ने धरती को लहूलुहान कर दिया था, लेकिन बंदूकों और जंगलों से होने वाला पारंपरिक नक्सलवाद और माओवादी हिंसा अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

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