देश में खाद्य महंगाई का असर पोषण पर सीधे तौर पर पड़ रहा है। पोषण का सबसे जरूरी हिस्सा प्रोटीन सबके लिए महंगा हो गया है। यहां देखें एक साल में प्रोटीन के प्रमुख स्रोत कितने महंगे हुए?Food Inflation Vs Nutrition and Protein : महंगाई का असर अब सिर्फ रसोई के कुल बजट तक सीमित नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ रहा है कि आपकी थाली में प्रोटीन कितना और किस कीमत पर पहुंच रहा है। दाल हो या पनीर, अंडे हों या चिकन प्रोटीन के कई प्रमुख स्रोत पिछले एक साल में महंगे हुए हैं। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो सीमित बजट में रोजाना संतुलित और पौष्टिक खाना खाने की कोशिश करते हैं।
CPI और CRISIL के थाली इंडेक्स के डेटा के हिसाब से पिछले एक साल में शाकाहारी थाली की कुल लागत करीब 6-8%, जबकि मांसाहारी थाली की लागत 7-9% तक बढ़ी है। यानी वेज हो या नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली में प्रोटीन का खर्च बढ़ा है। इसका महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि प्रोटीन शरीर की रोजाना जरूरत का जरूरी हिस्सा है। लेकिन जब दाल, अंडे, दूध, पनीर या चिकन जैसे खाद्य पदार्थ लगातार महंगे होते हैं, तो परिवार अक्सर मात्रा घटाने या सस्ते विकल्प तलाशने पर मजबूर हो सकते हैं।
खाद्य महंगाई का दबाव इस समय फिर दिखाई दे रहा है। जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई थी, जबकि खाद्य महंगाई 5.52% रही। खाद्य महंगाई बढ़ने में लहसुन, अदरक और प्याज जैसी चीजों की कीमतों की अहम भूमिका रही। RBI की अगस्त की रिपोर्ट में भी 21 अगस्त तक खाद्य कीमतों में व्यापक स्तर पर बढ़ोतरी की बात सामने आई है। यानी रसोई के खर्च पर दबाव सिर्फ किसी एक-दो खाद्य वस्तु तक सीमित नहीं है।वहीं, सरकार का दैनिक मूल्य निगरानी तंत्र देशभर के 555 बाजार केंद्रों से 22 जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों का डेटा जुटाता है। इसमें चना दाल, अरहर दाल, उड़द, मूंग, मसूर, दूध, प्याज और टमाटर जैसी चीजें शामिल हैं।
दाल से चिकन तक, प्रोटीन कितना महंगा?
प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों की कीमत में बढ़ोतरी हर श्रेणी में एक जैसी नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, दाल और अरहर की कीमत करीब 7.8% बढ़ी, जबकि पनीर और डेयरी उत्पाद करीब 4.5% महंगे हुए। सोयाबीन और टोफू में बढ़ोतरी करीब 3.2% रही। मांसाहारी विकल्पों में चिकन ब्रेस्ट की कीमत में करीब 8.1% की बढ़ोतरी बताई गई है। अंडे करीब 6.2% और स्थानीय मछली करीब 5.4% महंगी हुई।
| प्रोटीन स्रोत | एक साल में अनुमानित कीमत बढ़ोतरी | करीब प्रोटीन |
|---|---|---|
| दाल/अरहर | 7.8% | 9 ग्राम |
| पनीर/डेयरी | 4.5% | 18 ग्राम |
| सोयाबीन/टोफू | 3.2% | 17 ग्राम |
| अंडे | 6.2% | 13 ग्राम* |
| चिकन ब्रेस्ट | 8.1% | 22 ग्राम |
| स्थानीय मछली | 5.4% | 18 ग्राम |
*रिपोर्ट में दो अंडों के लिए करीब 13 ग्राम प्रोटीन का अनुमान दिया गया है।
हालांकि, यहां एक जरूरी बात है। हाल की बाजार रिपोर्टों में अंडों की खुदरा कीमतों पर इससे कहीं ज्यादा तेज दबाव भी सामने आया है। 2026 में एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अंडे पिछले साल के मुकाबले करीब 35-40% तक महंगे बताए गए हैं। इसका कारण पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होने वाले मक्के की लागत बढ़ना बताया गया है। इसलिए अलग-अलग रिपोर्टों के आंकड़े समय, बाजार और कीमत मापने के तरीके के आधार पर अलग हो सकते हैं।
वेज थाली में सबसे बड़ा सवाल दाल का
भारतीय शाकाहारी थाली में प्रोटीन का सबसे आम और अपेक्षाकृत सस्ता स्रोत दाल है। यही वजह है कि दालों की कीमत में बढ़ोतरी सीधे पोषण के बजट को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में दाल और अरहर की कीमत करीब 7.8% बढ़ी। इसके साथ सब्जियों, मसालों और दूसरी रसोई सामग्री की कीमतों में उतार-चढ़ाव होने से पूरी थाली का खर्च बढ़ा। यानी परिवार के सामने सिर्फ यह सवाल नहीं रहता कि दाल कितने रुपये किलो मिल रही है। सवाल यह भी है कि महीने के सीमित राशन बजट में दाल की मात्रा, सब्जी, दूध और बाकी जरूरी खाद्य पदार्थों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। इसी दबाव के चलते विश्लेषण में वेज थाली की कुल लागत में 6-8% की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।
नॉन-वेज थाली में चिकन और अंडे ने बढ़ाया खर्च
मांसाहारी भोजन करने वाले परिवारों के लिए चिकन और अंडे प्रोटीन के सबसे आम विकल्पों में शामिल हैं। लेकिन इन दोनों की कीमत बढ़ने से नॉन-वेज थाली भी महंगी हुई है। रिपोर्ट में चिकन ब्रेस्ट की कीमत में 8.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मछली भी करीब 5.4% महंगी हुई। चिकन और अंडों की कीमत पर फीड की लागत का भी असर पड़ता है। हालिया रिपोर्ट में मक्के की बढ़ती मांग और उससे पोल्ट्री फीड की लागत बढ़ने को अंडों की कीमत में तेज उछाल से जोड़ा गया है। उपलब्ध विश्लेषण के मुताबिक इन बढ़ी हुई कीमतों के कारण नॉन-वेज थाली की कुल लागत 7-9% तक बढ़ी है।










































