Chitrakoot Flood: मध्य प्रदेश के चित्रकूट में आई भीषण बाढ़ के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। मंदाकिनी नदी के उफान से तबाह हुए क्षेत्रों में 700 से अधिक लोगों का रेस्क्यू किया गया है। स्थिति को देखते हुए सीएम ने अगले दो-तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण बताए हैं ।सतना: मध्य प्रदेश के धार्मिक और तीर्थ नगर चित्रकूट में आई भीषण बाढ़ ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मूसलाधार बारिश के चलते मंदाकिनी और सेमरावल नदियों का जलस्तर इस कदर बढ़ गया कि पानी रिहायशी इलाकों, घरों और दुकानों में घुस गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। स्थिति का जायजा लेने के खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव चित्रकूट पहुंचे और उन्होंने पानी से लबालब भरे इलाकों का पैदल दौरा कर नुकसान का जायजा लिया।
700 लोगों का हुआ रेस्क्यू
सतना जिले के इस प्रमुख तीर्थ स्थल पर आई इस आपदा के दौरान प्रशासन की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टल गया और पिछले 24 घंटों में 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों से मिलकर सीएम ने उन्हें ढांढस बंधाया और भोजन, कपड़े व राशन जैसी आवश्यक सामग्रियां वितरित कीं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस प्रलयकारी बाढ़ में किसी भी अगले दो-तीन दिन बेहद अहम
हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि अगले दो से तीन दिन प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे फिलहाल चित्रकूट में ही कैंप करें और स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखें। इसके साथ ही सतना जिले भर में घर-घर जाकर सर्वे करने के आदेश दिए गए हैं, ताकि मकानों, दुकानों और मवेशियों को हुए नुकसान का सही आकलन किया जा सके।
कलेक्टर ने दी राहत की जानकारी
प्रशासन अब बुनियादी सेवाओं जैसे बिजली और दूरसंचार को बहाल करने में जुट गया है। सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस ने बताया कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब खतरे के निशान से करीब तीन मीटर नीचे आ चुका है, जिससे राहत मिली है। एहतियात के तौर पर जिला प्रशासन ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को सतना जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है, ताकि बच्चों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।










































