उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
पद्मेश न्यूज।वारासिवनी। खैरलांजी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत किन्ही स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मंदिर टोला में व्याप्त समस्याओं, जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र छात्राओं के पालकगणों का १ सितम्बर को गुस्सा फू ट पड़ा। पालकों ने एकत्र होकर तहसीलदार खैरलांजी में तीरथ प्रसाद अक्षरिया को एक ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के जल्द से जल्द निराकरण की मांग की है। इस अवसर पर शासकीय प्राथमिक शाला मंदिर टोला किन्ही के समस्त पालकगण एवं समग्र शिक्षा समिति के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
एक शिक्षक के भरोसे ३२ बच्चों का भविष्य
ज्ञापन में पालकों ने बताया कि प्राथमिक शाला मंदिर टोला में कक्षा १ से ५ तक कुल ३२ छात्र.छात्राएं अध्ययनरत हैं। इतने बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय में वर्तमान में मात्र एक ही शिक्षक पदस्थ हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब उक्त शिक्षक को अध्यापन के साथ साथ अन्य विभागीय कार्य जैसे बीएलओ ड्यूटी आदि भी सौंप दिए जाते हैं। जब शिक्षक विभागीय कार्य से बाहर जाते हैंए तो बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है और उन्हें रसोइया के भरोसे छोडऩा पड़ता है। इससे बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर अभिभावक बेहद चिंतित हैं। विद्यालय की पुरानी इमारत अत्यंत जर्जर अवस्था में है ,जिससे कभी भी कोई दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। विद्यालय परिसर एवं आसपास कचरा और गंदगी फैली हुई है। पालकों के अनुसार परिसर में पूर्व में कई बार जहरीले सांप भी निकल चुके हैं जिससे बच्चों की जान को खतरा बना रहता है।
पालकों यह रखी मांग
ज्ञापन में विधार्थियो के पालको के द्वारा प्राथमिक शाला मंदिर टोला में तत्काल अतिरिक्त शिक्षक की पदस्थापना करने, जर्जर भवन का तकनीकी निरीक्षण करवाकर अनुपयोगी होने की स्थिति में उसे तुरंत डिस्मेंटल यानि ध्वस्त कराया जाये, विद्यालय परिसर की साफ. सफ ाई कराकर आसपास और ग्राउंड में सीमेंटीकरण कराया जायें। इसमें पालकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का निराकरण कर ३२ बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो समस्त पालक और ग्रामीण जन मिलकर स्कूल में ताला बंद करेंगे और उग्र चक्का जाम आंदोलन करने पर मजबूर होंगे जिसकी संपूर्ण जवाबदारी स्वयं शासन प्रशासन की होगी।
जान का खतरा बना हुआ है
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष २०२० से पुराना शाला भवन जर्जर अवस्था में है जिसे ध्वस्त करने की मांग हमारे द्वारा लगातार की जा रही है परंतु इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं विषैला जीव जंतुओं का डर हर समय बना रहता है हमारे छोटे छोटे बच्चे शिक्षा अध्ययन करने के लिए आते हैं। जहां दो शिक्षक थे इसमें एक शिक्षक छुट्टी पर गई है तो अब एक शिक्षक है जो अन्य विभागीय कार्य भी देख रहा है। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता पूरी तरह समाप्त हो गई है, जिसका प्रभाव हमारे बच्चों के परीक्षा परिणाम में देखने को मिलेगा। यदि ऐसा ही रहा तो भविष्य में कोई दुर्घटना भी घटित हो सकती है ,क्योंकि स्कूल में ध्यान देने वाला शिक्षक अधिक समय कार्यों से बाहर रहता है। ऐसे में इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा बच्चों को स्कूल शिक्षित करने भेजना भी अब जोखिम भरा लगने लगा है।










































