ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद के बीच अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम पिक्स का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि सितंबर में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने पर वह उन्हें पिक्स इस्तेमाल करने के लिए कहेंगे। अमेरिका पिक्स पर अमेरिकी क्रेडिट कार्ड कंपनियों के साथ अनुचित प्रतिस्पर्धा का आरोप लगाते हुए जांच कर रहा है। वहीं, भारत की यूपीआई भी इसी तरह तुरंत और कम लागत में डिजिटल भुगतान की सुविधा देती है। इस विवाद के बीच ब्राजील और अमेरिका के बीच व्यापार और राजनयिक तनाव भी बढ़ा हुआ है।ब्राजील और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अपने देश की डिजिटल पेमेंट प्रणाली Pix का खुलकर बचाव करने का ऐलान किया है। लूला ने कहा कि सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अगर उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होती है, तो वह बातचीत में Pix का मुद्दा उठाएंगे।
साओ पाउलो राज्य के साओ जोसे दो रियो प्रेटो में एक राजनीतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लूला ने कहा कि वह ट्रंप से मुलाकात के दौरान उन्हें Pix इस्तेमाल करने की सलाह देंगे। उन्होंने कहा, “मैं ट्रंप से मिलूंगा और उनसे कहूंगा कि Pix का इस्तेमाल करके देखें कि यह कितना अच्छा है।”
क्या है ब्राजील का पिक्स सिस्टम?
पिक्स को ब्राजील के केंद्रीय बैंक ने नवंबर 2020 में लॉन्च किया था। यह एक ऐसी डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसके जरिए लोग 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन तुरंत पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं। लॉन्च होने के बाद से पिक्स ब्राजील में भुगतान के प्रमुख माध्यमों में शामिल हो गया है।प्राइवेट बैंकों द्वारा संचालित भुगतान ऐप्स के विपरीत, पिक्स ब्राजील के केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित है। इसकी अपार लोकप्रियता के कारण पिछले वर्ष 7 ट्रिलियन डॉलर का लेनदेन हुआ, हालांकि अब वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसे पारंपरिक क्रेडिट नेटवर्क को दरकिनार करते हुए अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपों को लेकर अमेरिकी सरकार द्वारा इसकी जांच की जा रही है।
ब्राजील में 2020 में शुरू किया गया PIX एक तेज डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। इसके जरिए ब्राज़ील में बैंक खाता रखने वाला व्यक्ति, कंपनी या सरकारी संस्था कुछ ही सेकंड में पैसे भेज या प्राप्त कर सकती है। पिक्स से क्यूआर कोड स्कैन करके भी भुगतान किया जा सकता है। आम लोगों से PIX के जरिए पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। कंपनियों से कुछ बैंक मामूली शुल्क ले सकते हैं, लेकिन यह सामान्य बैंक ट्रांसफर की तुलना में काफी कम होता है। सामान्य बैंक ट्रांसफर में पैसे पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं, जबकि PIX से भुगतान तुरंत हो जाता है।
अमेरिका को क्यों है आपत्ति?
जुलाई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने पिक्स को लेकर जांच शुरू की थी। अमेरिका का आरोप है कि पिक्स अमेरिकी क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है, क्योंकि यह बिना ज्यादा शुल्क के भुगतान की सुविधा देता है। खास बात यह है कि भारत में भी पिक्स जैसी ही डिजिटल पेमेंट व्यवस्था यूपीआई है। यूपीआई से बिना किसी लेनदेन शुल्क के तुरंत पैसे भेजे जा सकते हैं। मार्च में यूपीआई के जरिए करीब 300 अरब डॉलर के भुगतान किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने भारत की यूपीआई व्यवस्था के खिलाफ ऐसी कोई जांच शुरू नहीं की है।
पिक्स लेकर विवाद ब्राजील और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापक व्यापारिक तनाव का हिस्सा है। अमेरिका ने कुछ ब्राजीलियाई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया है और ब्राजील की डिजिटल पेमेंट प्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अमेरिका की ओर से ब्राजील पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ कुछ उत्पादों पर 25 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। इसी बीच लूला ने संकेत दिया है कि वह ट्रंप के साथ संभावित बातचीत में व्यापार के साथ-साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को भी उठाएंगे।
अमेरिकी राजदूत के वीजा विवाद पर भी बढ़ा था तनाव
दोनों देशों के बीच तनाव सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। अगस्त में लूला ने वॉशिंगटन में ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा रिबेरो वियोटी का वीजा रद्द किए जाने के अमेरिकी फैसले की भी आलोचना की थी। लूला ने इस फैसले को गैर-जिम्मेदाराना और बिना सोचे-समझे लिया गया कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि दो सदियों से ज्यादा पुराने राजनयिक संबंधों वाले देशों के बीच इस तरह का फैसला उचित नहीं है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने ब्राजील की राजदूत का वीजा रद्द करने के पीछे कई कारण बताए थे। इनमें ब्राजील द्वारा दो अमेरिकी अधिकारियों को वीजा जारी न करना और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नामित ब्राजील में राजदूत डेनियल पेरेज की नियुक्ति को मंजूरी देने में कथित देरी शामिल थी। लूला ने इसके जवाब में अमेरिका की राजनयिक मौजूदगी पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन ने खुद ब्राजील में अपनी राजनयिक उपस्थिति को लेकर लंबे समय तक जल्दबाजी नहीं दिखाई और अमेरिकी दूतावास डेढ़ साल से अधिक समय तक प्रमुख प्रतिनिधि के बिना रहा।










































