Mohan Bhagwat Samwad: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद में संवाद किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे यहां सेक्युलर शब्द लागू नहीं होता है। भारत धर्मप्राण देश है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम दुनिया के संघर्षों के बीच में नहीं पड़ते हैं।उज्जैन: संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद में संवाद किया है। संवाद के दौरान संघ प्रमुख ने युवाओं को धर्म और रिलीजन मतलब समझाया है। उन्होंने धर्म हमें मुक्त करता है और रिलीजन बांधता है। हमें धर्म को मानना है। संघ प्रमुख ने कहा कि पाश्चत्य तरीके से खेती करने की वजह से गड़बड़ियां हो रही हैं।मैं धर्म का विशेषज्ञ नहीं हूं
मोहन भागवत ने कहा कि गीता और रामायण को रिटायरमेंट के बाद पढ़ने के ग्रंध है, लेकिन ऐसा नहीं है। धर्म अस्तित्व के प्रारंभ से लेकर अंत तक रहता ही है और सब कुछ उसी के अनुसार चलता है। आप इसको मानो या मत मानो। दुनिया में कुछ चीजों हैं, सूर्य है, आप कुछ नहीं कर सकते।उन्होंने कहा कि अगर नहीं मानते, तो मत मानो, लेकिन उसका उदय और अस्त निश्चित है। जब कोई व्यक्ति अहंकार में आकर काम करता है, यह मानकर कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, तो उसे गलतफहमी हो जाती है कि चीजें वैसी ही होंगी जैसा वह चाहता है, लेकिन ऐसा नहीं है। जब मुझे उद्घाटन भाषण देना था, तो मेरे मन में कई विचार आ रहे थे कि मुझे क्या कहना चाहिए। मैं धर्म का विशेषज्ञ नहीं हूं स्वामी जी इस पर बोलने के लिए अधिकृत हैं।भारत के हर शहर में धर्मशाला बनवाया
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने पहले भी बिजनेस किया। सालों से करते आ रहे हैं। उनलोगों ने धर्मदाय किया है। शहरों में लोगों के लिए धर्मशाला बनवाए हैं। उन्होंने कहा कि अपनी बुद्धि से कमाओ और लोगों में भी बांटों। अपने जीवन को चलाओ लेकिन दूसरों को कष्ट नहीं हो। तुम्हारा जीवन चलेगा तो सबका जीवन चलेगा। हम कमाई करें लेकिन दूसरों को धक्का नहीं पहुंचे।
सत्य पर आधारित है धर्म
उन्होंने कहा कि धर्म सत्य पर आधारित है। यह अनेकता प्राकृतिक और सृष्टि की है। इसे स्वीकार करना है। सत्य यह है कि हम सब एक हैं। उन्होंने कहा कि सत्य बड़ा कठोर है। सत्य के कारण ही हमारे अंदर संवेदना है। सबके प्रति अपनी संवेदना होती है।हम जिएंगे सबको जिलाएंगे
मोहन भागवत ने कहा कि हम जिएंगे और सबको जिलाएंगे। भारत धर्मप्राण देश है। हम आर्थिक और सामरिक दृष्टि से बड़ा बनेंगे। लेकिन हमारा ये गंतव्य नहीं है ये पड़ाव है। अपने यहां सेक्युलर शब्द लागू नहीं होता है। हमारे यहां राज्य भेदभाव नहीं करता है। सबका सम्मान करता है। हम लक्ष्मी जी के उपासक हैं। हमने जीवन को अलग-अलग काटकर नहीं देखा है।हमारे संदर्भों में सेक्युलर लागू नहीं होता
संवाद में संघ प्रमुख ने कहा कि हमारे यहां सेक्युलर लागू नहीं होता है। भारत में जब भी भारतीयों का राज्य रहा, यहां राज धर्म के आधार पर ही चला है। पश्चिम में एक देश है जो हमें बार-बार परेशान करता है। लेकिन हम कुछ नहीं करते हैं। दुनिया के संघर्षों के बीच में हम नहीं पड़े है। हमने संकट के समय लोगों की मदद की है। किसी भी विचारधारा की सरकार हमारे देश में रही हो लेकिन हमलोगों ने मदद की है। क्योंकि हमारे जिन में धर्म है।रिलिजन के ऊपर है धर्म
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुदेव रानाडे, एक इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में डीन ऑफ फिलॉसफी हो गए, साक्षात्कारी महापुरुष थे। वो कहते थे कि ‘हर धर्म के ऊपर एक और धर्म है।’। उस रिलिजन को देखकर ये रिलिजन चलेंगे तो ठीक रहेगा। क्योंकि उनके समय अंग्रेजी भाषा में धर्म के लिए कोई समय, कोई शब्द नहीं रहा। आज भी नहीं है। उस समय हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था और जिनको समझाना थे कि हमारी विरासत श्रेष्ठ है। इसलिए उन्होंने ‘रिलीजन’ शब्द का इस्तेमाल किया… धर्म रिलिजन के ऊपर है। जब रिलिजन धर्म के अनुसार चलते हैं तो रिलिजन मनुष्य को मुक्ति दिलाते हैं। जब रिलिजन धर्म को छोड़कर चलते हैं तब फिर सांप्रदायिक कलह होते हैं। धर्म के नाम पर सब प्रकार के अत्याचार होते हैं… रिलिजन शब्द का अर्थ अलग है।मोहन भागवत ने कहा कि रिलिजन रिलीजियो से आया है, बांधना होता है, एक अनुशासन में रखना होता है, उसको कहते हैं रिलीजियो। धर्म बांधता नहीं है, धर्म मुक्त करता है। धर्म का ‘धृ’ शब्द से शब्द आया है, धारणा करना यह होता है। और इसलिए ये जो हमारे मन में सैकड़ों वर्षों की आत्मविस्मरण के कारण और दो सौ वर्षों की कुसंस्कार के कारण जो गांठें बनी हैं, जो परत बनी है, जो सत्य ज्ञान को अंदर आने नहीं देती…”
विश्व ले प्रेरणा
उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं का जीवन ऐसा हो, जिससे सारा विश्व उनसे प्रेरणा ले। मोहन भागवत ने यह भी कहा कि युवा धर्म का विचार करते हैं। धर्म की बात करने पर लोग बुढ़ापे की बात करते हैं।










































