आमतौर पर चीन में क्या हो रहा है, इसकी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आ पाती है। लेकिन, चीन के बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल कुछ इतना बड़ा हो रहा है कि चीन इसे चाहकर भी नहीं छिपा पा रहा है।China Bank Crisis : चीन की बैंकिंग इंडस्ट्री (Banking Industry) में इस समय बड़े बदलाव से गुजर रही है। एक साल के भीतर चीन में 670 बैंकों पर ताला लग चुका है। यह संख्या इतनी बड़ी है कि फिच (Fitch Ratings) के मुताबिक यह चीन के बैंकिंग सेक्टर का करीब एक-चौथाई हिस्सा बनता है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या ये बैंक किसी बड़े संकट की वजह से बंद हो रहे हैं या चीन इन बैंकों के जरिये कुछ बड़ा करने का इरादा रखता है। चीन में बैंक बंद होने का सिलसिला नया नहीं है। बल्कि, पिछले 3-4 साल में चीन में कुल बैंकों की संख्या में करीब 23 फीसदी की कमी आई है।
670 बैंक क्यों हुए खत्म?
चीन के वित्तीय नियामक छोटे और कमजोर क्षेत्रीय बैंकों की संख्या घटाकर कम करने में जुटे हैं। इसके पीछे का मकसद मजबूत और बड़े बैंक बनाना है। चीन के नेशनल फाइनेंशियल रेगुलेटरी एडमिनिस्ट्रेशन (NFRA) के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के अंत तक रेगुलेटर्स के दायरे में आने वाले वित्तीय संस्थानों की संख्या 711 घटकर 6,489 रह गई। इसमें अकेले रूरल स्माल और मीडियम की संख्या 670 कम हुई, यानी 18.6% की गिरावट।
बैंक बंद करने से क्या मिलेगा?
इन बैंकों को बंद करने के पीछे सबसे बड़ा कारण बैंकिंग सिस्टम में रिस्क को कम करना है। छोटे रूरल बैंक कई बार कमजोर कैपिटल बेस, सीमित कारोबारी दायरे और कमजोर गवर्नेंस के कारण बड़े झटकों को सहन नहीं कर पाते। चीन की सरकार अब इन्हें बड़े बैंकों में मिलाकर उनकी निगरानी और कैपिटल पोजिशन को मजबूत करना चाहती है।क्या है असली परेशानी?
चीन की इकोनॉमी पर लंबे समय से प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी, घटती घरेलू डिमांड और लो इंट्रेस्ट रेट के दबाव से गुजर रही है। इसका असर छोटे बैंकों की कमाई पर भी पड़ा है। Fitch के मुताबिक चीन के ग्रामीण बैंकों का रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 2021 के 0.56% से घटकर 2026 की पहली छमाही में 0.45% रह गया। यानी बैंकिंग ऐसट्स पर कमाई लगातार कमजोर हुई है। दूसरी तरफ इन बैंकों का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) रेश्यो 2.8% पहुंच गया, जबकि पूरे बैंकिंग सेक्टर का औसत करीब 1.5% था।
प्रॉपर्टी और लोकल कर्ज ने बढ़ाई मुश्किल
छोटे और ग्रामीण बैंकों की लोन बुक में स्माल बिजनेस, प्रॉपर्टी डेवलपर और लोकर गवर्नमेंट के प्रोजेक्ट का बड़ा एक्सपोजर रहा है। प्रॉपर्टी मार्केट की कमजोरी और लोकल गवर्नमेंट के बढ़ते कर्ज ने बैंकों को खतरे में डाल दिया है। यही वजह है कि छोटे बैंकों को अब बड़े बैंकों में मर्ज किया जा रहा है।
क्या चीन में बैंकिंग क्राइसिस आ गया है?
670 बैंकों का खत्म होना निश्चित रूप से बड़ा आंकड़ा है, लेकिन इसे सीधे तौर पर चीन में बैंकिंग क्राइसिस नहीं कहा जा सकता है। बल्कि, चीन के रेगुलेटर एक बड़े बैंकिंग संकट को टालने में जुटे हैं। क्योंकि, ये बैंक चीन की इकोनॉमी क के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं। अगर चीन समय रहते इस मामले में कदम नहीं उठाता है, तो बड़ी ढांचागत तबाही की तरफ बढ़ सकता है।






































