Parrots Home In Indore: इंदौर में मेट्रो रेल निर्माण की जद में तोतों का आशियाना आ रहा है। मामला हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान मेट्रो रेल कंपनी ने कहा है कि रानी सराय को बचाने के लिए 400 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने होंगे।इंदौर: रानी सराय के पुराने पेड़ों पर बने तोतों के बसेरों को बचाने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। इन पेड़ों को मेट्रो स्टेशन के निर्माण से बचाने के लिए स्टेशन की जगह बदलने की मांग की गई है। बुधवार को इस मामले में मेट्रो कंपनी ने हाईकोर्ट में अपना जवाब पेश किया। अगर तोतों के घरों को बचाया जाता है तो 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे।400 करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है लागत
इंदौर मेट्रो का निर्माण कर रही कंपनी ने बताया कि स्टेशन की जगह बदलने की स्थिति में रीगल टॉकीज, प्रीतमलाल दुआ सभागृह और गांधी हॉल क्षेत्र को विकल्प के तौर पर देखा गया है। हालांकि कंपनी ने तीनों जगहों को व्यावहारिक नहीं बताया है। मेट्रो के अनुसार स्टेशन की जगह बदलने पर परियोजना की लागत करीब 400 करोड़ रुपए तक बढ़ सकती है और काम में भी कई साल की देरी हो सकती है।
पुराने पेड़ों पर है तोतों का घर
रानी सराय और रीगल क्षेत्र में पुराने पेड़ों पर बड़ी संख्या में तोते आते हैं। यहां कई पेड़ 50 से 60 साल पुराने बताए गए हैं। पर्यावरण से जुड़े लोगों और याचिकाकर्ता की ओर से इन पेड़ों को पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इन्हें बचाने की मांग की गई है। उनका कहना है कि पुराने पेड़ों के तनों में प्राकृतिक रूप से बनी जगहों पर तोतों ने अपने बसेरे बना रखे हैं। पेड़ हटने के बाद नए पौधों में ऐसी स्थिति बनने में काफी समय लग सकता है।हाईकोर्ट के जज भी पहुंचे थे रानी सराय
पिछले दिनों हाईकोर्ट के दो जज भी शाम के समय रानी सराय क्षेत्र में पक्षियों के बसेरे देखने पहुंचे थे। पर्यावरणविद् भालू मोंढे और अधिवक्ता अभिनव धनोतकर ने उन्हें क्षेत्र के पुराने पेड़ और उनमें बने पक्षियों के बसेरे दिखाए थे। इस दौरान यह भी बताया गया था कि लगातार भारी ट्रैफिक वाले इलाके में होने के बावजूद यहां तोते नियमित रूप से आते हैं और इन पेड़ों पर रहते हैं।
रीगल टॉकीज में निजी जमीन की जरूरत
मेट्रो कंपनी ने कोर्ट को बताया कि रीगल टॉकीज क्षेत्र में स्टेशन बनाने के लिए मिल्की-वे परिसर के साथ करीब 5 हजार वर्गमीटर निजी जमीन की जरूरत पड़ सकती है। इस विकल्प में होटल, सरकारी आवास और जजों के बंगलों के प्रभावित होने की बात कही गई है। कंपनी के अनुसार निजी जमीन लेने की प्रक्रिया में करीब दो साल लग सकते हैं। इसके कारण परियोजना तीन से चार साल तक पीछे जा सकती है। इस विकल्प में करीब 400 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान बताया गया है।प्रीतमलाल दुआ सभागृह में भी दिक्कत
दूसरे विकल्प के रूप में प्रीतमलाल दुआ सभागृह क्षेत्र का परीक्षण किया गया। मेट्रो कंपनी के अनुसार यहां स्टेशन बनने पर प्रीतमलाल दुआ सभागृह, महावीर स्तंभ, सिंगापुर मार्केट और अहिल्या पुस्तकालय प्रभावित हो सकते हैं। निर्माण के दौरान हाईकोर्ट के बगीचे पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। इसके अलावा हाईकोर्ट के गेट नंबर एक और दो को बंद रखना पड़ सकता है।
गांधी हॉल ऐतिहासिक इमारत
गांधी हॉल को तीसरे विकल्प के तौर पर देखा गया। मेट्रो कंपनी का कहना है कि राजवाड़ा स्टेशन के निर्माण के कारण प्रस्तावित रूट में बदलाव करना संभव नहीं है। गांधी हॉल ऐतिहासिक इमारत है। ऐसे में इसके ढांचे को प्रभावित करने का विकल्प भी व्यावहारिक नहीं माना गया है।







































