रूस ने दावा किया है कि उसने यूक्रेन बॉर्डर से अपने सैनिकों को बेस पर वापस बुला लिया है। समाचार एजेंसियों के हवाले से जारी इस खबर के बाद दुनिया ने राहत की सांस ली है। इससे पहले आशंका जताई गई थी कि क्या रूस, यूक्रेन पर हमला करने जा रहा है? यूक्रेन के राष्ट्रपति के एक फेसबुक पोस्ट के बाद पूरी दुनिया में डर का माहौल बन गया था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोमवार को घोषणा की थी कि बुधवार, 16 फरवरी ‘एकता का दिन’ होगा, क्योंकि उस दिन उनके देश पर रूसी आक्रमण शुरू हो सकता है। इसके साथ ही यूक्रेन में बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया गया था। साथ ही अमेरिका ने भी यहां अपना दूतावास खाली कर दिया था। इससे पहले बाइडेन प्रशासन ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यूक्रेन पर कभी भी हमला हो सकता है।
भारतीय दूतावास ने भारतीयों से यूक्रेन छोड़ने को कहा
इस बीच, कीव में भारतीय दूतावास ने वर्तमान स्थिति की अनिश्चितताओं को देखते हुए भारतीयों, विशेष रूप से उन छात्रों को यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा है। अपील की गई है कि जिन छात्रों का यूक्रेन में रहना जरूरी नहीं है, वे तत्काल भारत लौट आएं।
अमेरिका ने कहा, रूस ने यूक्रेन की सीमाओं पर तैनात किए एक लाख 30 हजार से ज्यादा सैनिक
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की घंटे भर की वार्ता यूक्रेन पर हमले की आशंका कम नहीं कर पाई। बाइडन ने रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलिंस्की से भी करीब घंटे भर बात और मदद का भरोसा दिलाया। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि रूस ने यूक्रेन की सीमाओं पर एक लाख 30 हजार से ज्यादा सैनिकों को तैनात कर दिया है। हालांकि, जेलिंस्की ने अपने नागरिकों से शांत बने रहने की अपील करते हुए रूसी हमले की आशंका के ठोस सुबूत मिलने से इन्कार किया है। वहीं, जर्मनी ने यूक्रेन पर हमला होने की स्थिति में रूस को गंभीर दुष्परिणामों की चेतावनी दी है। वैसे जर्मनी के चांसलर ओलफ शुल्ज मंगलवार को रूस के दौरे पर जा रहे हैं, वहां पर वह राष्ट्रपति पुतिन से मिलकर तनाव कम करने का प्रयास करेंगे। इससे पहले सोमवार को वह यूक्रेन जाएंगे। इस बीच अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने अपने दूतावास कर्मियों को यूक्रेन की राजधानी कीव से हटाना शुरू कर दिया है। विद्रोहियों के कब्जे वाले डोनबास इलाके में तैनात अमेरिकी पर्यवेक्षक दल भी हटाया जा रहा है।
रूसी हमले की आशंका को पुष्ट करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है। अभी भी तनाव को खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस बाबत हो रहे प्रयासों के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया है। रूसी हमले की आशंका के बावजूद यूक्रेन ने अपना आकाशीय मार्ग बंद या सीमित नहीं किया है। लेकिन कई प्रमुख एयरलाइन कंपनियों ने कीव की अपनी उड़ानें कम करनी शुरू कर दी हैं। दो-तीन दिन में तनाव कम न होने पर ज्यादातर प्राइवेट कंपनियों ने अपनी सेवाएं बंद करने के संकेत दिए हैं। इस बीच यूक्रेन सरकार ने एयरलाइन कंपनियों को काला सागर के ऊपर से विमान न उड़ाने की सलाह दी है। कहा है कि काला सागर में रूस के युद्धपोत युद्धाभ्यास कर रहे हैं, इसलिए वहां से विमानों का गुजरना खतरनाक साबित हो सकता है।
यूक्रेन मसले पर अभी तक तीखे बयानों से परहेज कर रहे जर्मनी ने रविवार को रूस को गंभीर दुष्परिणामों की चेतावनी दे डाली। कहा कि यूक्रेन पर हमले की स्थिति में रूस पर जो प्रतिबंध लगेंगे वे उसके लिए बहुत पीड़ादाई और विनाशकारी होंगे। ये प्रतिबंध लगाने के लिए सभी पश्चिमी देश एकजुट हैं। विदित हो कि जर्मनी की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए रूस प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। माना जा रहा था कि इसी वजह से जर्मन सरकार तीखी जुबान नहीं बोल रही थी, वह मसले के शांतिपूर्वक निदान की बात कह रही थी। लेकिन मास्को यात्रा से पहले चांसलर शुल्ज की जुबान बदल गई।
यूक्रेन पहुंचा हथियारों का जखीरा
यूक्रेन को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से हथियार मिलने जारी हैं। रविवार को अमेरिका के दो और मालवाहक विमान 180 टन हथियार और गोला-बारूद लेकर कीव पहुंचे। यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनीकोव ने बताया है कि अभी तक 17 विमानों से आए 1,500 मीट्रिक टन हथियार और गोला-बारूद प्राप्त हो चुके हैं। इनके अतिरिक्त नाटो के सदस्य देश लिथुआनिया ने अमेरिका में बनीं स्ट्रिंगर एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल यूक्रेन पहुंचा दीं। लिथुआनिया ने ये मिसाइल अमेरिका की सहमति से दी हैं। इनसे पहले ब्रिटेन दो हजार एंटी टैंक मिसाइल और अन्य सैन्य सामग्री यूक्रेन को दे चुका है।










































