रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध प्रारंभ हो जाने के बाद यूक्रेन में फसे लोगों की चिंता खड़ी हो गई है। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने बालाघाट जिले से तीन लड़कियां गई थी। जिसमें से भटेरा चौकी वार्ड नंबर 2 निवासी मुस्कान गौतम अपने देश सकुशल वापस लौट आई है जिसे सुबह के समय दिल्ली के एमपी भवन में होना बताया गया, वही देर रात्रि तक मुस्कान के बालाघाट पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। मुस्कान को अपने देश पहुंच जाने की खबर लगते ही इनके परिवार के लोगों में हर्ष व्याप्त हो गया है।
आपको बताएं कि यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही तीनों लड़कियों द्वारा वहां युद्ध प्रारंभ होते ही अपने देश लौट आने का प्रयास प्रारंभ कर दिया गया था। लेकिन वे जैसे तैसे यूक्रेन की बॉर्डर तक ही पहुंच पाई। भटेरा चौकी निवासी छात्रा मुस्कान गौतम हंगरी बॉर्डर में थी, मलाजखंड निवासी छात्रा प्रगति ठाकरे रोमानिया बॉर्डर में है वही अन्य एक छात्रा जो कि मोहगांव निवासी है उसे भी यूक्रेन के किसी बॉर्डर में होना बताया जा रहा है। युद्ध प्रारंभ होने के बाद से इन छात्राओं के परिजनों में चिंता खड़ी हो गई है।
यह भी बताये कि मुस्कान गौतम पिछले 4 वर्षों से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है पढ़ाई पूर्ण होने को डेढ़ वर्ष का समय शेष है। पिछले नवंबर माह में ही वह यूक्रेन गई थी। परिवार के लोगों में मुस्कान अपने देश में पहुंचने की जानकारी लगते ही काफी खुशी है, लेकिन यह भी चिंता है कि अब उसकी पढ़ाई का क्या होगा क्योंकि मुस्कान की पढ़ाई के लिए लाखों रुपए लग चुके हैं।
बाईट ममता गौतम, मुस्कान की मम्मी
मुस्कान की छोटी बहन कशिश गौतम ने सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यूक्रेन में दो तीन चीजें अच्छी है जिसके कारण भारत देश के बच्चे वहां पढ़ाई करने जाते हैं। यहां प्राइवेट कॉलेज में खर्च बहुत आता है मेडिकल की पढ़ाई करने करीब 1 करोड़ रुपये तक खर्च आता है वही यूक्रेन में 30 से 40 लाख रुपये में 5 वर्ष का कोर्स कंप्लीट हो जाता है।
बाईट – कशिश गौतम, मुस्कान की छोटी बहन
इस समय सबसे ज्यादा परेशान वे परिवार है जिनके बच्चे अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं और अपने बच्चों के पहुंचने की और सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं। क्षेत्र के दो बच्चे अभी भी यूक्रेन की बॉर्डर में फंसे हैं।
मलाजखंड निवासी छात्रा प्रगति ठाकरे की बहन जान्हवी ठाकरे ने मोबाइल पर चर्चा के दौरान बताया कि उनकी प्रगति ठाकरे से मोबाइल पर बात हुई थी वह अभी भी रोमानिया बॉर्डर पर है वहां देश के बहुत से बच्चे फंसे हुए हैं। यूक्रेन 5 फ्लाइट जाने की बात कहीं जा रही है लेकिन रात में बस एक फ्लाइट गई थी, परसों बच्चे लाइन में खड़े थे उस दिन भी वेट करने कहा गया और कल भी इंतजार करने के लिए ही कहा गया। रोमानिया बॉर्डर के पास एक शेल्टर है वहां पर सभी बच्चे रह रहे हैं। वही मोहगांव की एक छात्रा पोलैंड बॉर्डर पर होने के बारे में जानकारी मिली है।










































