भारत के आयात और निर्यात के बीच कमी आने से वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारतीय चालू खाता घाटा बिगड़ सकता है। यह बात वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कही है। वैश्विक कमोडिटी कीमतों में नरमी से महंगाई पर लगाम लग सकती है, लेकिन भारत के चालू खाते के घाटे को कम करने के लिए उनके ऊंचे स्तरों में भी तेजी से गिरावट की जरूरत है। बता दें कि शादी के मौसम के बीच सोने के आयात में अचानक और तेज उछाल आई है, क्योंकि कई शादियों को 2021 से 2022 तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों के कारण भी व्यापार घाटे पर भी दबाव बढ़ा है। देश का व्यापार घाटा अप्रैल-जून 2022 की अवधि में बढ़कर 45.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 5.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने हाल ही में सोने पर सीमा शुल्क को वर्तमान 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.0 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, चालू खाते के घाटे में गिरावट सेवा निर्यात में वृद्धि के साथ कम हो सकती है, जिसमें भारत व्यापारिक निर्यात की तुलना में विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी है। चालू खाता घाटा बढ़ने से जनवरी 2022 से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 80 अंक को छूने के कगार पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये की कीमत में आई गिरावट के अलावा वैश्विक जिंस कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव वाले आयात भी महंगे हो गए हैं, जिससे सीएडी को कम करना और मुश्किल हो गया है।












































