BRICS Summit 2026: राजधानी दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के चलते शहर के लक्जरी होटलों में कमरों की भारी किल्लत हो गई है। विदेशी प्रतिनिधियों और मेहमानों की वजह से ताज, ओबेरॉय और लीला पैलेस जैसे प्रमुख होटलों में कमरे पूरी तरह बुक हो चुके हैं।BRICS Summit 2026: राजधानी दिल्ली में आगामी 12 से 13 सितंबर को आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के कारण शहर के लक्जरी होटल बाजार में अचानक जबर्दस्त हलचल देखने को मिल रही है। इस बहुप्रतीक्षित आयोजन के चलते मध्य दिल्ली और आसपास के इलाकों में स्थित पांच सितारा होटलों (BRICS Summit Hotel Booking) में कमरों की भारी कमी हो गई है, वहीं किराये में भी ऐतिहासिक उछाल आया है। स्थिति यह है कि कई बड़े होटलों में या तो एक भी कमरा खाली नहीं है या फिर एक रात का किराया छह अंकों यानी लाखों रुपये में वसूला जा रहा है।
होटल बुकिंग प्लेटफॉर्म्स पर 11 से 13 सितंबर के बीच की गई पड़ताल से पता चलता है कि ताज महल और ताज पैलेस जैसे मशहूर होटलों में इन तारीखों के लिए कोई भी कमरा उपलब्ध नहीं है। वहीं ‘द ओबेरॉय’ और ‘द लीला पैलेस’ जैसी दिग्गज संपत्तियां भी इन खास तारीखों के लिए नई बुकिंग स्वीकार नहीं कर रही हैं। जिन गिने-चुने होटलों, जैसे आईटीसी मौर्य और शांगरी-ला इरोज में कमरे बचे हैं, वे प्रतिनिधियों और यात्रियों से असाधारण रूप से भारी-भरकम प्रीमियम वसूल रहे हैं।कई दिनों के लिए एक साथ कमरों की भारी मांग
दरअसल, दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधि, अधिकारी और विदेशी पत्रकार सम्मेलन की आधिकारिक तारीखों से काफी पहले ही दिल्ली पहुंचने लगते हैं और सम्मेलन खत्म होने के बाद भी अपने प्रवास को आगे बढ़ाते हैं। इस वजह से कई दिनों के लिए एक साथ कमरों की भारी मांग पैदा हो गई है। इसका सीधा असर उन आम पर्यटकों, व्यावसायिक यात्रियों और परिवारों पर पड़ रहा है, जिन्होंने काफी समय पहले से ही दिल्ली आने का प्लान बना रखा था। अब उन्हें रुकने के लिए भारी खर्च करना पड़ रहा है।
‘ब्रिक्स सम्मेलन इस साल होटल उद्योग के राजस्व में सबसे बड़ा योगदान’
वैश्विक मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच, भारतीय होटल उद्योग के लिए यह मांग एक बड़ा सहारा बनकर आई है। रैडिसन होटल ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में होने वाला ब्रिक्स सम्मेलन इस साल होटल उद्योग के राजस्व में सबसे बड़ा योगदान दे रहा है। पूरे सितंबर महीने में औसत कमरों की दरों में पिछले साल के मुकाबले 25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारों का मा









































