दुनियाभर में AI पर अरबों डॉलर दांव पर लगे हैं। लेकिन, निवेशकों को अपेक्षा के मुताबिक नतीजे नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह से अब AI Stocks ग्लोबल इक्विटी मार्केट के लिए बड़ा संकट बनते जा रहे हैं।China AI Market Crash : पिछले करीब 2 साल से दुनियाभर के कई बड़े मार्केट एक्सपर्ट, दिग्गज निवेशक और इंडस्ट्री लीडर लगातार यह बात बोल रहे हैं कि AI का बुलबुला कभी भी फट सकता है, जिससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में तबाही आ सकती है।
क्या AI Bubble फटने लगा है? यह सवाल उठ रहा है, क्योंकि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शेयर बाजार यानी चीन में इस साल कंपनियों के मार्केट कैप से 3.5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 333.48 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं। यह रकम करीब-करीब भारत की पूरी GDP के बराबर है।
चूंकि दुनिया में AI के विकास में चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में निवेश भी इन्हीं देशों के बाजारों में हुआ है। ऐसे में जब चीन में AI स्टॉक्स औंधे मूंह गिर रहे हैं और दुनियाभर के बाजार लुढ़क रहे हैं। ऐसे में अब निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार पर है। क्योंकि, अमेरिकी बाजार में भी AI स्टॉक्स की वजह से भारी असंतुलन बना हुआ है और अगर अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट आती है, तो यह एक बड़े ग्लोबल क्रैश की वजह बन सकता है।चीन में अब तक क्या हुआ?
मई 2026 में बने शिखर के बाद चीन के शेयर बाजार से ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के हिसाब से करीब $3.5 ट्रिलियन की मार्केट वैल्यू साफ हो चुकी है। चीन के बाजार में बिकवाली के पीछे सबसे बड़ी वजह AI कारोबार और उसकी कमाई है। एक तरफ AI की वजह से नौकरियों पर संकट आ रहा है, जिससे घरेलू मांग घट रही है। वहीं, दूसरी तरफ AI में निवेश की वजह से कंपनियों का मुनाफा घट रहा है। ऐसे में यह बाजार पर दोहरे दबाव की स्थिति बन रही है। इस स्थिति की वजह से नुकसान सिर्फ AI कंपनियों को नहीं हो रहा है। बल्कि चीन के पूरे इक्विटी मार्केट में उथल-पुथल है।
चीन के बाजार में कितनी बड़ी गिरावट?
चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट है। यहां मई 2026 में बने शिखर से अब तक करीब $3.5 ट्रिलियन की मार्केट वैल्यू घट चुकी है। इस बिकवाली का असर बड़े शेयरों पर भी पड़ा है। चीन के प्रमुख ब्लू-चिप शेयरों को ट्रैक करने वाला CSI 300 इंडेक्स जून में बने अपने उच्च स्तर से करीब 20% नीचे आ गया है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, चीन की कंपनियों के लिए 2026 की कमाई के अनुमान भी घटे हैं। मार्च के अंत के मुकाबले MSCI China Index की कंपनियों की सालाना कमाई के अनुमानों में 4% से अधिक की गिरावट आई है।
AI कंपनियों से $480 अरब साफ
चीन के पूरे शेयर बाजार में आई गिरावट और AI सेक्टर के नुकसान को अलग-अलग समझना जरूरी है। AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों पर केंद्रित शंघाई का STAR 50 इंडेक्स जुलाई के हाई से चार महीने से भी कम समय में करीब 40% गिर चुका है। इस गिरावट से लगभग $480 अरब की मार्केट वैल्यू खत्म हुई है।
वहीं, गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के मुताबिक, चीन और हांगकांग के बाजारों में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैप में AI शेयरों की हिस्सेदारी करीब 42% है। बाजार में कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी इनकी हिस्सेदारी लगभग 57% है। ऐसे में AI शेयरों में बड़ी गिरावट का असर व्यापक बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है।
क्या अब अमेरिकी शेयर बाजार की बारी?
चीन की गिरावट के बीच अमेरिकी टेक शेयरों पर भी दबाव के संकेत मिले हैं। अमेरिका में AI कंपनियां डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और चिप्स पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। फिलहाल, अमेरिकी बाजार के बेंचमार्क Nasdaq 100 में अकेले AI स्टॉक्स का वेटेज करीब 40% है। सैम ऑल्टमैन से लेकर जेफ बेजोस तक खुद यह कह चुके हैं कि AI बबल कभी भी फट सकता है। इसके अलावा एंथ्रोपिक और ओपन एआई जैसी कंपनियों के नतीजे निवेशकों में बेचैनी बढ़ा रहे हैं।
दिग्गजों को पूरा यकीन डूबेगा AI निवेशकों का पैसा
AI पर भारी खर्च और कैश फ्लो को लेकर चिंताओं के बीच Alphabet के शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में करीब 10% गिर गए, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यू में लगभग $400 अरब की कमी आई। वहीं, रे डालियो, माइकल बरी और गैरी मार्केस जैसे दिग्गज लगातार AI स्टॉक्स की वजह से अमेरिीक बाजार में बड़ी गिरावट की बात कर रहे हैं। यहां तक कि माइकल बरी ने तो सार्वजनिक तौर पर बताया है कि उन्होंने कई बिलियन डॉलर AI स्टॉक्स को शॉर्ट करने में लगाए हैं।





































