इंदौर। शहर में जहां-तहां बज रहे लाउड स्पीकरों की वजह हो रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी भले ही दावा करें कि स्थिति नियंत्रित है, लेकिन वास्तविकता इससे उलट है। पांच दिन पहले ही हाई कोर्ट के सामने से डीजे शोर मचाता हुआ निकला और कोई कार्रवाई नहीं हुई। ध्वनि प्रदूषण को लेकर की जा रही कार्रवाई से संतुष्ठ नहीं हैं।
अगली सुनवाई से पहले जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ध्वनि प्रदूूषण रोकने के लिए आखिर वह कर क्या रहा है तो कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना पडेगा।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की बातों से कुछ नहीं होगा। प्रशासन को बताना चाहिए कि वास्तव में क्या कार्रवाई की जा रही है। इन कार्रवाइयों का क्या परिणाम रहा और भविष्य में प्रदूषण रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।










































