अपनी बचत को सुरक्षित निवेश विकल्प के साथ बढ़ाने की योजना बना रहे हैं तो एफडी में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, एफडी में निवेश को लेकर बहुत सी बातें मायने रखती हैं।फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले लोगों के लिए ज्यादा ब्याज दर मायने रखती है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद कुछ नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) ने अपनी एफडी की ब्याज दरों में बदलाव किया है। ऐसे में सवाल यह कि क्या ज्यादा रिटर्न के लिए NBFC की एफडी स्कीम में पैसा लगाना चाहिए?
NBFC की FD पर कितना मिल रहा ब्याज?
बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) ने 7 अक्टूबर 2026 से अपनी एफडी की ब्याज दरों में 15 से 40 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की है। अब सामान्य निवेशकों को 31 से 60 महीने की अवधि वाली एफडी पर अधिकतम 7.75% सालाना ब्याज मिल रहा है। वहीं, सीनियर सिटीजन के लिए यह दर 8.15% तक है। कंपनी ने एक साल की एफडी पर ब्याज दर भी 6.60% से बढ़ाकर 6.80% कर दी है।
दूसरी ओर, श्रीराम फाइनेंस (Shriram Finance) ने 11 अक्टूबर से नई ब्याज दरें लागू की हैं। कंपनी की 36 से 60 महीने की जमा योजनाओं पर सामान्य निवेशकों को अधिकतम 7.85% सालाना ब्याज मिल सकता है। एलिजिबल सीनियर सिटीजन को नियमों और शर्तों के अनुसार अतिरिक्त 50 बेसिस पॉइंट का लाभ मिलता है, जिससे दर 8.35% तक पहुंच सकती है।बैंक FD या NBFC FD, कहां मिलेगा बेहतर फायदा?
हालांकि, केवल ज्यादा ब्याज दर देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं है। बैंक एफडी और NBFC एफडी के बीच सबसे बड़ा अंतर जमा राशि की सुरक्षा का है। DICGC के नियमों के तहत पात्र बैंक जमा पर प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक मूलधन और ब्याज मिलाकर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। हालांकि, NBFC की एफडी पर यह बीमा सुरक्षा उपलब्ध नहीं होती। इसलिए NBFC में निवेश करने से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग, वित्तीय स्थिति, भुगतान का रिकॉर्ड और समय से पहले पैसा निकालने की शर्तों की जांच करना जरूरी है। ज्यादा ब्याज के साथ जोखिम भी बढ़ सकता है।
क्या अभी FD में निवेश करना चाहिए?
ब्याज दरों में आगे बदलाव की संभावना को देखते हुए पूरी रकम एक ही लंबी अवधि की एफडी में लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि की एफडी चुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, निवेश को एक, दो और तीन साल की एफडी में बांटा जा सकता है। इससे जरूरत पड़ने पर कुछ रकम उपलब्ध रहती है और भविष्य में दरें बढ़ने पर दोबारा निवेश का अवसर मिलता है।
इसके अलावा, पहले से चल रही एफडी को तोड़कर नई योजना में पैसा लगाने से पहले जुर्माने, टैक्स और वास्तविक रिटर्न का हिसाब जरूर लगाएं।








































