तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने ओमान और रूस की यात्रा के साथ संकेत दे दिए हैं कि इस्लामाबाद अब एक विश्वसनीय मध्यस्थ नहीं रहा है। हालांकि अब्बास अराघची इस्लामाबाद भी गये थे लेकिन नई रिपोर्ट्स में पता चला है कि ईरान अपनी कूटनीति में रणनीतिक बदलाव कर रहा है। दुनिया के कई और देशों के साथ संपर्क बढ़ाकर ईरान अब सिर्फ पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। ईरान के कई एक्सपर्ट और सांसदों ने अमेरिका के पक्ष में बातें करने के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की है।
सीएनएन न्यूज 18 ने खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कई देशों से संपर्क साधना, कूटनीतिक माध्यमों में विविधता लाने की एक सोची-समझी कोशिश का हिस्सा है। हालांकि तेहरान ने इस्लामाबाद से बातचीत करके अपनी अहमियत बनाए रखने का संकेत दिया लेकिन इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में ईरान अब सिर्फ पाकिस्तान पर ही मध्यस्थ के तौर पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
ईरान धीरे धीरे पाकिस्तान को कर रहा किनारे
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच तीन वजहों से बातचीत टूट गई थी। सुरक्षा की गारंटी, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण ईरान का परमाणु कार्यक्रम। ये तीनों ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें सुलझाना अत्यंत मुश्किल है। इन मतभेदों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते प्रभाव ने और भी बढ़ा दिया है जिसने ज्यादा सख्त रवैया अपना लिया है जिससे तेहरान के लिए कूटनीतिक लचीलेपन की गुंजाइश कम हो गई है। इस आकलन में यह बताया गया है कि तेहरान, दुश्मनी में आए मौजूदा ठहराव को किसी समझौते की दिशा में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि एक रणनीतिक वापसी के बजाय एक ‘रणनीतिक विराम’ के तौर पर देख रहा है।









































