ट्रेड डील पर तारीख पर तारीख, अमेरिका दिखा रहा हरी झंडी पर भारत क्यों कर रहा है हर शर्त की फूंक-फूंक कर जांच?

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US India Trade Deal: मामले की जानकारी रखने वाले और बातचीत में शामिल सूत्रों ने बताया है कि अमेरिका की तरफ से बार-बार यह भरोसा दिलाए जाने के बावजूद कि भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने के करीब है इसके मौजूदा स्वरूप में साइन किए जाने की संभावना कम है। ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक कि नई दिल्ली की बची हुई चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता।वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और भारत एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के ‘काफी करीब’ हैं। यह समझौता उन समझौतों से ‘काफी अलग’ होगा जो अमेरिका ने अन्य देशों के साथ किए हैं। भारत के साथ व्यापार समझौते से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा ‘वे एक समझौता करना चाहते हैं। हम भी एक समझौता करने जा रहे हैं। हां, हम काफी करीब हैं। यह हमारे द्वारा पहले किए गए समझौतों से बिल्कुल अलग तरह का समझौता होगा।’

लेकिन दिक्कत ये है कि भारत और अमेरिका के नेता पिछले डेढ़ वर्षों में दर्जनों बार कह चुके हैं कि व्यापार समझौता बहुत जल्द होने वाला है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इसी हफ्ते कहा है कि दोनों पक्ष समझौते पर हस्ताक्षर करने के ‘बेहद करीब’ हैं और ’99 प्रतिशत काम’ पूरा हो चुका है।नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से बात करते हुए जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट रोबिंदर सचदेव जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की काफी बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं उन्होंने ’99 प्रतिशत’ के दावे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से पिछले दिनों कहा था कि अगर 99 प्रतिशत समझौता हो चुका है तो तारीख भी बताना चाहिए। आखिर ऐसी क्या बात है कि कई महीने बीतने के बाद भी समझौते का ऐलान नहीं हो रहा है?

अमेरिका के साथ ट्रेड डील साइन करने से क्यों हिचक रहा भारत?

चर्चाओं की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने द संडे गार्जियन से कहा ‘अमेरिका का यह कहना कि समझौता पूरा होने के करीब है इसका मतलब यह नहीं है कि भारत इसे अपने मौजूदा स्वरूप में साइन करने के लिए सहमत हो गया है। पहले बाकी बची चिंताओं का समाधान होना जरूरी है।’वहीं मामले की जानकारी रखने वाले और बातचीत में शामिल सूत्रों ने ऑउटलेट को बताया कि अमेरिका की ओर से बार-बार यह भरोसा दिलाए जाने के बावजूद कि भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने के करीब है इसके मौजूदा स्वरूप में साइन किए जाने की संभावना कम है। ऐसा तब तक नहीं होगा जब तक कि नई दिल्ली की बची हुई चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता।

बातचीत में शामिल एक सूत्र ने कहा ‘इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर देखें। अमेरिका कई महीनों से दावा कर रहा है कि समझौता साइन होने के करीब है लेकिन हकीकत यह है कि यह समझौता अभी भी अटका हुआ है।’

सूत्रों का कहना है कि वाशिंगटन की तरफ से बार-बार दिए जा रहे इन संकेतों को कि समझौता पूरा होने वाला है इस रूप में नहीं समझा जाना चाहिए कि भारत इसे साइन करने के लिए तैयार है।

व्यापार समझौते को लेकर हैं काफी गंभीर आपत्तियां

चर्चाओं की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने संडे गार्जियन को बताया है कि जब तक भारत की चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता तब तक यह समझौता अपने मौजूदा स्वरूप में साइन नहीं किया जाएगा। ये मुद्दे भारत के हितों की रक्षा से जुड़े हैं और सरकार अमेरिका की तरफ से बताई गई समय-सीमा को पूरा करने के लिए इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती।’सूत्रों के मुताबिक प्रस्तावित समझौते के प्रावधानों को लेकर व्यापार संगठनों, कृषि समूहों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सहित घरेलू नीति से जुड़े विभिन्न वर्गों ने अपनी आपत्तियां जताई हैं। इनमें डेटा लोकलाइजेशन (डेटा को देश के भीतर ही रखने) और अन्य ऐसे मुद्दे शामिल हैं जिनका भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों पर असर पड़ सकता है।

भारत पर तुरंत समझौता करने का प्रेशर नहीं

सूत्रों ने द संडे गार्जियन को बताया है कि पिछले कई महीनों से बातचीत पूरी करने के लिए वाशिंगटन की तरफ से लगातार दबाव बनाए जाने के बावजूद भारत ने अपना रुख कायम रखा है। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों पक्षों की अपनी-अपनी घरेलू मजबूरियां हैं। अमेरिका चाहता है कि समझौता जल्द हो जाए जबकि भारत पर तुरंत साइन करने का कोई ऐसा दबाव नहीं है।

चर्चा में शामिल एक अन्य सूत्र ने कहा ‘अमेरिका की अपनी घरेलू जरूरतें हैं और वह इस समझौते को पूरा करना चाहता है। भारत पर ऐसी कोई मजबूरी नहीं है कि वह सिर्फ इसलिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दे क्योंकि वाशिंगटन इसे जल्दी पूरा करना चाहता है।

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