भारत सरकार दूर-दराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए सैटेलाइट कम्युनिकेशन मार्केट को ग्लोबल कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी कर रही है और मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने के लिए ‘सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम’ लागू करने पर विचार कर रही हैसैटेलाइट इंटरनेट देने वाली कंपनियों को देश में जल्द शुरुआत करने में मदद करने के लिए भारत सरकार स्पेस सेक्टर के लिए ‘सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम’ लाने पर विचार कर रही है। इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT), मिनिस्ट्री ऑफ इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग (MIB) और स्पेस रेगुलेटर इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के बीच बातचीत हो चुकी है। ET टेलीकॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित सिस्टम का मकसद बार-बार मंजूरी लेने की प्रक्रिया को कम करना और कंपनियों को अलग-अलग विभागों से मंजूरी मिलने में लगने वाले समय को घटाना है ताकि कंपनियां अपनी सर्विस जल्द शुरू कर सकें।भारत में सैटकॉम बिजनेस को मंजूरी दिलाने का मतलब है कई विभागों से होते हुए जाना। DoT, MIB और IN-SPACe के अलावा, मंजूरी किस चीज की ली जा रही है, इसके आधार पर डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस, गृह और विदेश मंत्रालय और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से भी सलाह ली जाती है। स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो के सैटेलाइट वेंचर जैसी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के लिए मंत्रालयों के बीच सुरक्षा मंजूरी की भी जरूरत होती है।













































