आदिवासी बच्चों की असमय मौतों से आक्रोश व्याप्त, लालबर्रा बंद आज

0

म.प्र. आदिवासी विकास परिषद ने लालबर्रा बंद को सहयोग करने की दुकानदार एवं व्यापारियों से की अपील

पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। बिरसा विकासखंड के सुदूर वनांचल कोरका, कोंडेकसा एवं बोदरी सहित अन्य वनग्राम में बैगा जनजाति के परिवारों पर आई दुख की घड़ी ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। क्षेत्र में अज्ञात बीमारी के कारण अब तक २९ बच्चों की मृत्यु की दु:खद घटना के बाद कई परिवार गहरे सदमे और संकट से गुजर रहे हैं। इस तरह से आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही अज्ञात मौतों को लेकर आदिवासी समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रशासनिक उपेक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली से नाराज आदिवासी समाज, एसटी, एससी, ओबीसी के सहयोग से जिला बंद का आव्हान किया गया है। इसी कड़ी में आदिवासी विकास परिषद लालबर्रा ने ३ सितंबर को लालबर्रा बंद का आव्हान किया है। बंद के साथ ही पूरे नगर में विशाल धरना प्रदर्शन और रैली का आयोजन कर शासन-प्रशासन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करवाया जायेगा। आदिवासी समुदाय के पदाधिकारियों ने ३ सितंबर को लालबर्रा बंद को दुकानदारों, व्यापारियों से अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद कर सहयोग करने की अपील की है। इस अवसर पर मृत बच्चों को श्रध्दांजली भी अर्पित की जायेगी और स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।

प्रशासनिक लापरवाही से बनी गंभीर स्थिति

म.प्र. आदिवासी विकास परिषद लालबर्रा के पदाधिकारियों ने बताया कि बिरसा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रोंं में पिछले कई दिनों से बच्चे अज्ञात बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से रोकथाम के लिए कोई ठोस या प्रभावी कदम नहीं उठाये जा रहे है। प्रशासन की इस उदासीनता के कारण मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे समूचे आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश और भय का माहौल है। आगे बताया कि लगातार बच्चों की हो रही मौतों और प्रशासन की नींद न खुलने के विरोध में यह कदम उठाना पड़ा है। ३ सितंबर को बालाघाट जिला के साथ ही लालबर्रा भी बंद रहेगा। इस बंद को सफल बनाने के लिए स्थानीय व्यापारियों, बस संचालकों और आम जनता से समर्थन की अपील की गई है। वहीं ३ सितंबर की सुबह से ही लालबर्रा के मुख्य बाज़ारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और परिवहन सेवाओं पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है। आदिवासी समाज की प्रमुख मांग है कि बिरसा क्षेत्र में तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजकर बच्चों की मौतों के सही कारणों का पता लगाये जाये, प्रभावित गांवों में आपातकालीन स्वास्थ्य शिविर लगाकर हर बच्चे की जांच और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही, मृत बच्चों के परिजनों को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। वहीं समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि यदि बंद और धरना प्रदर्शन के बाद भी शासन-प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाये तो इस आंदोलन को राज्य स्तर पर और अधिक उग्र किया जायेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here