Sagar Hooch Tragedy: सागर के बंडा में जहरीली शराब त्रासदी से 22 लोगों की मौत और 160 से अधिक के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद लोग शराब पीने से बाज नहीं आ रहे हैं। कई मरीज अस्पताल से इलाज कराकर लौटने के बाद दोबारा जहरीली शराब पीकर फिर से अस्पताल पहुंच गए।सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा इलाके में हुई दर्दनाक जहरीली शराब त्रासदी के बीच एक बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। इतनी बड़ी तबाही और 22 लोगों की मौत के बावजूद शराबी अपनी लत से बाज नहीं आ रहे हैं और उन्होंने जहरीली शराब का सेवन जारी रखा है। हैरानी की बात यह है कि कुछ मरीज अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे और दोबारा शराब पीकर फिर से गंभीर हालत में अस्पताल पहुंच गए।
मौत के खौफ के बीच भी जारी रहा शराब का दौर
जब डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी पीड़ितों की जान बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे थे, तब कुछ ग्रामीण मौत और अस्पताल में भर्ती होने की खबरें सामने आने के बावजूद संदिग्ध जहरीली शराब गटक रहे थे। हालात यह हैं कि लगातार आ रहे मरीजों के बयानों और पुलिस सूत्रों से यह स्पष्ट हो गया है कि गांवों में अवैध और जहरीली शराब का सिलसिला थमा नहीं है और वह आसानी से उपलब्ध बनी हुई है।एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक मरीज को 6 सितंबर की सुबह ही अस्पताल से ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया था। लेकिन वह शाम होते-होते दोबारा शराब पीने के कारण गंभीर हालत में फिर से अस्पताल लौट आया, और इस बार उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
बंडा सिविल अस्पताल के आंकड़े
बंडा सिविल अस्पताल के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. योगेंद्र खटिक ने बताया कि 6 सितंबर को 100 से ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंचे थे, जिनमें से 60 से अधिक मरीज सोमवार दोपहर तक आए। इनमें से एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिन्होंने 5 सितंबर के बाद भी शराब पी थी, और कुछ ने तो मौतों की खबर फैलने के बाद भी इसका सेवन किया था।
- बंडा और सागर में जहरीली शराब पीने से मरने वालों का आंकड़ा 22 तक पहुंच गया है।
- 160 से ज्यादा लोगों को सागर और भोपाल के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
- कई मरीजों में जहरीली शराब के लक्षण देरी से विकसित हो रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ रही है।
- अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद दोबारा शराब पीने वाले मरीजों की मौत के मामले भी सामने आए हैं।
इलाके में अवैध शराब का सिंडिकेट
यह त्रासदी इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब के सिंडिकेट किस हद तक अपनी जड़ें जमा चुके हैं। पुलिस और प्रशासन ने हालांकि पहली घटनाएं सामने आने के बाद तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन धरातल पर जहरीली शराब की निरंतर आपूर्ति ने इस आपदा को और अधिक भयानक बना दिया है।
लोगों को जागरुक करना बड़ी चुनौती
इस घटना के बाद अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को इस जहर के प्रति जागरूक करने की है। यदि अवैध शराब के इस कारोबार पर पूरी तरह से नकेल नहीं कसी गई, तो ऐसी लापरवाहियों के कारण भविष्य में और भी बड़ी जानें जा सकती हैं।










































