Reservation Protest: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सवर्ण समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। दिल्ली आंदोलन से लौटे लोगों ने स्थानीय सवर्ण नेताओं के खिलाफ सांकेतिक अर्थी निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया। सोन नदी के किनारे सिर मुंडन करवाते हुए और पिंडदान कर नाराजगी जताई गई। इस दौरान मुद्दों को लेकर नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए गए।सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक बेहद अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सवर्ण समाज के लोगों ने अपने ही नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में शामिल रहे लोगों ने सीधी चुरहट विधानसभा क्षेत्र के सोन नदी के कोलदहा घाट पर पहुंचकर स्थानीय सवर्ण नेताओं की सांकेतिक अर्थी निकाली। इस दौरान लोगों ने हाथ में गोबर के उपले और अन्य पूजन सामग्री लेकर जोरदार नारेबाजी की और अनोखे तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
नाराजगी इस बात को लेकर थी कि तमाम मुद्दों पर जनता का समर्थन पाने वाले नेता आज सवर्ण समाज के हितों के लिए एक शब्द बोलने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शत्रुघ्न प्रसाद पांडे ने बताया कि समाज के लोगों ने इन नेताओं की आत्मा की शांति के लिए सोन नदी के किनारे सिर मुंडन करवाया और प्रतीकात्मक रूप से पिंडदान व अंतिम संस्कार जैसी रस्में निभाईं।नेताओं की चुप्पी पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शनकारियों का दर्द इस बात को लेकर भी छलका कि दिल्ली में उनके आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई। जंतर-मंतर के बजाय रामलीला मैदान भेजा गया और वहां भी कई तरह की बंदिशें लगाई गईं। शत्रुघ्न प्रसाद पांडे ने बाइट में बताया कि सरकारें और नीतियां सवर्ण समाज के खिलाफ तानाशाही रवैया अपना रही हैं। यूजीसी, एससी-एसटी एक्ट और जातिगत आरक्षण जैसे मामलों में समाज को लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने आगे कहा कि हमने जिन नेताओं को वोट देकर विधानसभा और संसद तक पहुंचाया, वे आज संसद या सदन में हमारे हक के लिए बोलने से कतरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में सवर्ण समाज खुद को अनाथ महसूस कर रहा है और मजबूरी में उन्हें यह अनोखा सांकेतिक विरोध का रास्ता चुनना पड़ा ताकि कुंभकर्ण की नींद सोए नेता जाग सकें।
एससी-एसटी एक्ट, आरक्षण और यूजीसी के मुद्दों को लेकर सरकार व नेताओं पर निशाना
सीधी जिले के सोन नदी तट पर सवर्ण समाज ने निकाली सांकेतिक अर्थी।
दिल्ली आंदोलन से लौटे लोगों ने स्थानीय नेताओं के खिलाफ जताया रोष।
सोन नदी के कोलदहा घाट पर कराया गया सिर मुंडन और पिंडदान।










































