गड्ढे में जा रहा गड्ढा भरने का पैसा, 14 लाख रुपये रोज हो रहे खर्च, इंदौर में हालत फिर भी बदहाल

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इंदौर नगर निगम सड़कों के गड्ढे भरने पर रोजाना करीब 14 लाख रुपये खर्च करता है। सालाना करीब 50 करोड़ रुपये का बजट सिर्फ गड्ढे भरने के लिए आरक्षित है। सड़कों के निर्माण पर आने वाला खर्च इससे अलग है।

इतने भारी भरकम खर्च के बावजूद शहर में गड्ढे कम होने का नाम नहीं ले रहे। गड्ढों को भरने के लिए आरक्षित यह पैसा गड्ढे में जा रहा है। पैचवर्क चल कहां रहा है, किसी को नहीं मालूम। शहरवासी गडढों में चलने को मजबूर हैं। न पेचवर्क में जुटी टीम कहीं नजर आ रही है न गड्ढों से मुक्ति मिल रही है। चौंकाने वाली बात तो यह कि आरक्षित राशि का एक बड़ा हिस्सा पेचवर्क के नाम पर निगम खर्च कर भी चुका है। बावजूद इसके सड़कों की स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।शहर में लगभग 70 प्रतिशत सड़कों का पूरी तरह से सीमेंटीकरण हो चुका है। बावजूद इसके अब भी पेचवर्क के नाम पर डामर का काम कराया जाता है। नगर निगम ने इस काम के लिए 50 करोड़ रुपये वार्षिक का बजट रखा है। यह बात खुद महपौर पुष्यमित्र भार्गव भी स्वीकार कर चुके है।

इतनी भारी राशि खर्च करने के बावजूद शहरवासी गड्ढेनुमा सड़कों पर चलने को मजबूर हैं। आरक्षित राशि में से करीब 12 करोड़ रुपये तो खर्च हो भी चुके हैं। सवाल इस बात पर भी उठ रहा है कि जब शहर में ज्यादातर सड़कें सीमेंट की हैं तो फिर डामर के पेचवर्क का क्या औचित्य। पानी गिरते ही डामर हट जाता है और फिर गड्ढे दोबारा नजर आने लगते हैं।

लगातार काम चलता है

पेचवर्क का काम सतत चलता है। वर्षाकाल से पहले पूरे शहर में पैचवर्क कर सड़कों के गड्ढे भरवाए थे। ठेकेदारों को एक साल तक इन सड़कों का रखरखाव भी करना है। फिलहाल वर्षा की वजह से काम रूका हुआ है। वर्षा थमते ही ठेकेदार बगैर किसी अतिरिक्त राशि के दोबारा पेचवर्क करेंगे। हमने सभी ठेकेदारों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए हैं। 

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