बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की आशंका के बीच मध्य प्रदेश में 1 सितंबर से बल्क कंज्यूमर्स के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा तय कर दी गई है। केंद्र सरकार के आदेश के तहत अब बड़े उपभोक्ता केवल 15 दिनों का ही स्टॉक रख सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।भोपाल: देशभर में चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की चिंताओं के बीच अब मध्य प्रदेश में भी शिकंजा कसने की तैयारी पूरी हो गई है। केंद्र सरकार के ‘शर्करा (थोक उपभोक्ताओं की स्टॉक होल्डिंग लिमिट) आदेश, 2026’ के तहत मध्य प्रदेश में 1 सितंबर से बल्क कंज्यूमर्स द्वारा रखे जाने वाले चीनी के स्टॉक पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार में कृत्रिम कमी और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है।
किसे और कितने दिनों का मिलेगा स्टॉक रखने का अधिकार?
नए नियमों के अनुसार, ऐसे उपभोक्ता जो महीने में कम से कम 10 मीट्रिक टन चीनी का इस्तेमाल करते हैं, वे केवल 15 दिनों के बराबर ही स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। यह प्रतिबंध आगामी 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगा। इस दायरे में मुख्य रूप से हलवाई (स्वीटमीट सेलर्स), कन्फेक्शनर्स, कोल्ड ड्रिंक मेकर्स, फूड प्रोसेसर्स और अन्य संस्थागत खरीदार आएंगे, जबकि सरकारी संस्थानों को इस नियम से पूरी तरह छूट दी गई हैव्हाइट शुगर की बिक्री तय और जीएसटी से निगरानी
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में अगस्त महीने के लिए घरेलू खपत वास्ते व्हाइट या रिफाइंड शुगर की बिक्री की सीमा 39,692 मीट्रिक टन तय की है, जिसमें कुल 22 शुगर प्लांट शामिल हैं। इन सभी खरीदों की निगरानी सीधे जीएसटी (GST) डेटा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही, राज्य के अधिकारियों को भौतिक स्टॉक सत्यापन करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई भी कारोबारी इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









































