जनजाति गर्जना डीलिस्टिंग महारैली में शामिल होने दिल्ली रवाना होंगे जिले के 600 से अधिक लोग

0
oplus_0

जनजाति सुरक्षा मंच के आवाहन पर 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में वृहद स्तर पर जनजाति संस्कृति समागम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों द्वारा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी संबंध में मंच के पदाधिकारी लखन मरावी ने स्थानीय रेलवे स्टेशन परिसर में प्रेस वार्ता आयोजित कर मीडिया को कार्यक्रम की जानकारी दी। प्रेस वार्ता के दौरान लखन मरावी ने बताया कि जनजाति समाज की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से इस विशाल समागम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए समाज को एकजुट करना आवश्यक है, इसी उद्देश्य के साथ देशभर से लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि महाकौशल क्षेत्र सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में जनजाति समाज के लोग दिल्ली पहुंचेंगे। बालाघाट से भी समाज के लोग 23 मई की सुबह 7 बजे रवाना होंगे। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, परंपरा, सामाजिक अधिकार और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारियों ने अनुसूचित जनजाति समुदाय से धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को मिलने वाले आरक्षण और शासकीय लाभों को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है। मंच का कहना है कि जो लोग जनजातीय धर्म, संस्कृति और परंपराओं को छोड़कर अन्य धर्म अपना रहे हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत मिलने वाले संवैधानिक अधिकार, आरक्षण और शासकीय योजनाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए। इसी मांग को लेकर 24 मई 2026 को देश की राजधानी दिल्ली में जनजाति गर्जना डीलिस्टिंग महारैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग शामिल होंगे। इस संबंध में जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारी लखन मरावी ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में लोग जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को छोड़कर अन्य धर्म अपना रहे हैं। उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन करने के बाद भी ऐसे लोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण, शासकीय योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं, जिससे वास्तविक जनजातीय समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। लखन मरावी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जनजाति की मूल संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और धार्मिक पहचान को छोड़ देता है, तो उसे उसी धर्म के अंतर्गत मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं का लाभ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के लिए संविधान द्वारा दिए गए विशेष अधिकार और आरक्षण उन लोगों के लिए हैं जो आज भी अपनी पारंपरिक जनजातीय जीवनशैली और संस्कृति के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में ऐसे कई लोग हैं जो जनजातीय समाज को छोड़कर अन्य धर्म अपना चुके हैं, लेकिन फिर भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के नाम पर शासकीय योजनाओं और आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। मंच का कहना है कि इससे वास्तविक जरूरतमंद जनजातीय समाज के लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर राष्ट्रीय जनजाति सुरक्षा मंच के आह्वान पर दिल्ली में जनजाति सांस्कृतिक समागम एवं जनजाति गर्जना डीलिस्टिंग महारैली आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधि शामिल होकर अपनी संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और धार्मिक पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन की मांग उठाएंगे।लखन मरावी ने बताया कि बालाघाट जिले से लगभग 600 लोग विशेष ट्रेन के माध्यम से 23 मई की सुबह 7 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वहीं पूरे महाकौशल क्षेत्र से लगभग 15 हजार से अधिक लोगों के दिल्ली पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनजातीय समाज के अधिकारों और पहचान से जुड़ा बड़ा आंदोलन है, जिसे आगे भी लगातार जारी रखा जाएगा। मंच की प्रमुख मांग यह है कि अनुसूचित जनजाति से अन्य धर्म में जाने वाले लोगों की डीलिस्टिंग की जाए। यानी ऐसे लोगों को अनुसूचित जनजाति वर्ग की सूची से हटाकर उन्हें मिलने वाले आरक्षण और शासकीय लाभों को समाप्त किया जाए, ताकि वास्तविक जनजातीय समाज के लोगों को उनका अधिकार मिल सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here