‘दिमागी नक्सल’, RSS प्रमुख के बयान, GDP पर बोले सैम पित्रोदा, राहुल गांधी को बताया मजबूत नेता

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भारत की पहली तिमाही में 7.8% GDP वृद्धि पर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने शिकागो में कहा, ‘आज रुपया लगभग 100 के करीब पहुंच गया है और मेरे लिए यह एक संकेतक है। दूसरा सवाल यह है कि आखिर यह कैसी वृद्धि है?’Sam Pitroda: इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा भारतीय अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मोहन भागवत के हालिया बयान, हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ से लेकर ‘दिमागी नक्सल’ पर बयान दिया है। पित्रोदा ने जीडीपी वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क में दिए गए भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि आप जो कहते हैं, उसका मतलब नहीं रखते और जो मतलब रखते हैं, वह कहते नहीं हैं। पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर पित्रोदा ने कहा कि अगर आप गरीबों के लिए खड़े हैं, तो आप नक्सली नहीं हैं।

‘क्या आर्थिक वृद्धि का लाभ नीचे तक पहुंच रहा?’

भारत की पहली तिमाही में 7.8% GDP वृद्धि पर इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने शिकागो में कहा, ‘आज रुपया लगभग 100 के करीब पहुंच गया है और मेरे लिए यह एक संकेतक है। दूसरा सवाल यह है कि आखिर यह कैसी वृद्धि है? क्या यह वृद्धि कुछ गिने-चुने लोगों के लिए है या भारत की जनता के लिए? क्या यह समान रूप से हो रही है? क्या इसका लाभ नीचे तक पहुंच रहा है, या हमने कुछ और अरबपति पैदा कर दिए हैं? मेरे लिए यह बहुत बुनियादी सवाल है।’

भागवत के बयान पर कही ये बात

RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर पित्रोदा ने कहा, ‘आप मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, बौद्ध और अन्य समुदायों के लोगों से पूछिए कि आज वे भारत में कैसा महसूस करते हैं, आपको जवाब मिल जाएगा। एक तरफ यह कहना कि हम सभी का सम्मान करते हैं और फिर पलटकर किसी को पीटना… आप जो कहते हैं, उसका मतलब नहीं रखते और जो मतलब रखते हैं, वह कहते नहीं हैं। यह सब कहना अच्छा लगता है, लेकिन क्या वास्तव में व्यवहार में भी ऐसा ही है?’हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में राहुल गांधी के खिलाफ FIR पर सैम पित्रोदा ने कहा, ‘राहुल गांधी एक मजबूत और ठोस नेता के रूप में सामने आए हैं, जिनमें बौद्धिक क्षमता, दृढ़ता, साहस और अपने विश्वास के प्रति प्रतिबद्धता है। मेरे लिए वह कांग्रेस पार्टी के ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ को व्यक्त करने वाले प्रमुख व्यक्ति हैं… हमने अपनी संस्थाओं को बहुत अधिक सत्ता प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीकृत करके कमजोर किया है। इसलिए न्यायपालिका, चुनाव आयोग, ED, आयकर विभाग और स्थानीय पुलिस सभी स्वतंत्र तरीके से काम करने से डरते हैं, क्योंकि अगर वे सरकार के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं तो उन्हें परेशान किया जाएगा… हमारे समाज में वास्तविक निगरानी रखने वाली संस्थाएं नहीं हैं।’

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