सिर में गोली लगी, शरीर का एक हिस्सा हुआ बेकार, फिर भी नहीं मानी हार,
मौत को मात देकर दौड़ा हॉक फोर्स का जांबाज
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट।कभी नक्सलियों का गढ़ कहे जाने वाला बालाघाट ज़िला,लंबे समय तक नक्सलवाद के लाल आतंक से जूझता रहा।जहा नक्सल मुक्त जिला बनाने की इस लड़ाई में कई जवानों ने अपनी जान गंवाई, तो कई घायल होकर भी हौसले के साथ वापस लौटे। ऐसे ही जांबाज हैं हॉक फोर्स के शिवकुमार शर्मा, जिनके सिर में नक्सलियों की गोली लगी थी। हालत ऐसी थी कि उनके दोबारा चलने की उम्मीद भी कम थी, लेकिन उन्होंने मौत को मात दी और सिर में आज भी नक्सलियों की गोली फसी हुई है फ़िर भी आज हर दिन 5-10 किलोमीटर दौड़ रहे हैं। .
17 नवंबर 2024 को दुगलई पहाड़ी के पास नक्सलियों ने सिर में मारी थी गोली
बताया गया कि मुरैना के रहने वाले शिवकुमार शर्मा 30 मई 2012 को पुलिस सेवा में भर्ती हुए और बाद में हॉक फोर्स का हिस्सा बने। नक्सल प्रभावित बालाघाट में तैनाती के बाद उन्होंने कई एंटी नक्सल ऑपरेशन में हिस्सा लिया। घने जंगलों में कई बार नक्सलियों से आमना-सामना हुआ, लेकिन हर बार शिवकुमार और उनकी टीम ने साहस के साथ मोर्चा संभाला। लेकिन 17 नवंबर 2024 का दिन उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल दिन साबित हुआ। सुरक्षा बलों को दुगलई की पहाड़ी पर नक्सलियों के मूवमेंट की सूचना मिली थी। हॉक फोर्स की टीम सर्चिंग के लिए पहुंची। टीम में शिवकुमार सबसे आगे थे। पहाड़ी की चोटी पर घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बीच एक गोली शिवकुमार के सिर में कनपटी के पास जा लगी। गंभीर रूप से घायल शिवकुमार को पहले गोंदिया के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत नाजुक होने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
आज भी हनुमान चौक में फंसी है गोली
बताया गया कि सिर में गोली लगने के बाद शिवकुमार की हालत बेहद गंभीर थी। शरीर का दायां हिस्सा काम नहीं कर रहा था और बोलने में भी परेशानी हो रही थी। कई महीनों तक इलाज चला, लेकिन शिवकुमार ने हार नहीं मानी। आज हादसे को डेढ़ साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है। शिवकुमार धीरे-धीरे रिकवरी कर रहे हैं। बोलने के लिए एक-एक अक्षर का अभ्यास करते हैं और अपनी फिटनेस पर भी लगातार काम कर रहे हैं।बालाघाट पुलिस के ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान के तहत आयोजित मिनी मैराथन में शिवकुमार ने भी दौड़ लगाई। जिस जवान के दोबारा चलने पर भी सवाल उठ रहे थे, वही आज हर दिन करीब 5-10 किलोमीटर दौड़ लगा रहा है।बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने भी शिवकुमार के जज्बे को सलाम किया। नक्सलियों की गोली आज भी उनके सिर में मौजूद है, लेकिन उनका हौसला उस गोली से कहीं ज्यादा मजबूत है। शिवकुमार की कहानी बताती है कि अगर हौसला जिंदा हो, तो इंसान मौत को भी मात देकर जिंदगी की नई दौड़ शुरू कर सकता है।
Byte शिवकुमार शर्मा,( हॉक फोर्स जवान)
Byte आदित्य मिश्रा, एसपी बालाघाट
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